विधानसभा में गुरुवार को भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती और वाल्मीकि समाज की पीड़ा को प्रमुखता से उठाया। विधायक ने सरकार से पुरजोर मांग की कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता दी जाए और उनके लिए अनुभव प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए। कोठारी ने […]
विधानसभा में गुरुवार को भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने सफाई कर्मचारियों की भर्ती और वाल्मीकि समाज की पीड़ा को प्रमुखता से उठाया। विधायक ने सरकार से पुरजोर मांग की कि सफाई कर्मचारियों की भर्ती में वाल्मीकि समाज को प्राथमिकता दी जाए और उनके लिए अनुभव प्रमाण पत्र की अनिवार्यता को समाप्त किया जाए।
कोठारी ने सदन में तर्क दिया कि वाल्मीकि समाज के लिए उनका जाति प्रमाण पत्र ही पर्याप्त होना चाहिए, क्योंकि सफाई का कार्य उन्हें विरासत में मिला है और जिस निपुणता से वे यह कार्य कर सकते हैं, वह किसी और वर्ग के लिए संभव नहीं है।
विधायक कोठारी ने स्थगन प्रस्ताव के तहत बोलते हुए कहा कि प्रदेश में पिछले 7 सालों से सफाई कर्मचारियों की कोई नई भर्ती नहीं निकली है। जबकि आबादी और शहर का दायरा लगातार बढ़ रहा है। उन्होंने प्रधानमंत्री के 'स्वच्छ भारत, समृद्ध भारत' के सपने का हवाला देते हुए कहा कि इस परिकल्पना को पूरा करने की धुरी सफाई कर्मचारी ही हैं, लेकिन उनकी अनदेखी हो रही है।
भीलवाड़ा शहर की बदहाल सफाई व्यवस्था का जिक्र करते हुए विधायक ने चौंकाने वाले आंकड़े रखे। उन्होंने बताया कि भीलवाड़ा में 2,300 सफाई कर्मचारियों की आवश्यकता है, लेकिन वर्तमान में महज 900 कर्मचारी ही कार्यरत हैं। ऐसे में शहर के मोहल्ले साफ कैसे होंगे?
विधायक ने संविदा कर्मियों की पीड़ा भी सदन पर रखी। उन्होंने कहा कि संविदा पर लगे कर्मचारियों को न तो पर्याप्त वेतन मिलता है और न ही नौकरी की सुरक्षा। इससे उनका शोषण हो रहा है। उन्होंने भावुक होते हुए कहा कि सफाई का कार्य कोई सरल नहीं है, यह बहुत कठिन कार्य है। उन्हें सुबह 5 बजे उठकर जाना पड़ता है।
कोठारी ने कहा कि वाल्मीकि समाज के लोग बिना किसी संकोच के सफाई का कार्य करते हैं, जो उनकी प्राथमिकता होनी चाहिए। उन्होंने सरकार से निवेदन किया कि जो नई भर्ती निकाली जाए, उसमें वाल्मीकि समाज को ही प्राथमिकता दी जाए क्योंकि वे ही बेस्ट सफाई कर पाएंगे।