भीलवाड़ा

mobile addiction bad बच्चे क्या देख रहे, निगरानी नहीं कर पा रहे अभिभावक

मोबाइल जीवन की प्रमुख आवश्यकताओं में शामिल हो गया है। यही आवश्यकता अब लत बन चुकी है। बच्चों से लेकर बड़े तक मोबाइल में खोए रहते हैं, जिससे सामाजिक रिश्तों के ताने.बाने में खटास ही नहीं आ रही बल्कि अपराध के दलदल में भी फ ंस रहे है। कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई का प्रमुख जरिया मोबाइल था।

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Jun 16, 2022
बच्चे क्या देख रहे, निगरानी नहीं कर पा रहे अभिभावक

mobile addiction bad मोबाइल जीवन की प्रमुख आवश्यकताओं में शामिल हो गया है। यही आवश्यकता अब लत बन चुकी है। बच्चों से लेकर बड़े तक मोबाइल में खोए रहते हैं, जिससे सामाजिक रिश्तों के ताने.बाने में खटास ही नहीं आ रही बल्कि अपराध के दलदल में भी फ ंस रहे है। कोरोना महामारी के दौरान ऑनलाइन पढ़ाई का प्रमुख जरिया मोबाइल था। अब बच्चे इसकी आदी हो गए। महामारी पर काबू पाने के बाद स्कूलों में ऑफ लाइन पढ़ाई शुरू हो गई, लेकिन स्कूली बच्चों के हाथ से मोबाइल नहीं छूट रहा।mobile addiction bad

मोबाइल, लैपटॉप पर बच्चे क्या.देख रहे। इसकी अभिभावक निगरानी नहीं रख पा रहे। इसका फ ायदा सोशल मीडिया प्लेटफ ार्म उठा रहे है। एक ही छत के नीचे होकर भी बच्चे दूर-दूर रहने लगे हैंए तो संयम की क्षमता भी उनमें घट रही है। परिजनों का डांटना भी अब उन्हें नागवार गुजर रहा है।

ऑनलाइन गेम पर ध्यान, अपराध की भी सीख
बदलते दौर के साथ अब अभिभावकों को भी बच्चों के प्रति सावधान रहने की जरूरत है। मोबाइल की लत का कारण ऑनलाइन मोबाइल गेम है। मोबाइल पर वीडियो बनाने का हद से ज्यादा शौक भी चढ़ गया है। इसी लत के कारण सोशल मीडिया प्लेटफ ार्म बच्चों को अपराध तक का रास्ता दिखाते है। 15 से 17 वर्ष के बच्चे में खास विवेक नहीं होता। जैसा सोशल मीडिया प्लेटफ ार्म दिखाता है। वैसा बच्चे करते है। इसी वजह से स्कूली शिक्षा से कई बच्चे अपराध के रास्ते में जा रहे है। बात झगड़े.फ साद की हो या फि र मारपीट और चोरी की। मोबाइल से ही वे बुरी आदत सीख रहे है। मोबाइल गेम के कारण बच्चों में गुस्सा बढ़ रहा है। यही नहीं अकेलापन और कई तरह की बीमारियां भी उन्हें घेर रहीं हैं। शहरी क्षेत्र के बच्चे तो तेजी से गेम एडिक्शन का शिकार हो रहे है। उकसाने के लिए कई गैंग के सदस्य दूसरे स्कूलों के बच्चों के साथ मारपीट के वीडियो बनाकर एक.दूसरे को भेजते हैं, ताकि वह अपनी दबंगता दिखा सके।

मोबाइल के दुष्परिणाम
. गेमिंग के हिसाब से बच्चों की साइकोलॉजी में बदलाव।
. बच्चे परिवार और दोस्तों से कटने लगे हैं।
. मानसिक और शारीरिक रूप से बच्चों की ग्रोथ पर नकारात्मक असर हो रहा
. बच्चों में तनावए गुस्साए चिड़चिड़ापन बढ़ा। पढ़ाई में भी मन नहीं लग रहा है।
. निर्णायक क्षमता घट रही है। बिना सोचे.समझे जल्दबाजी में फैसले करने लगे है।

ऐसे दूर करें बच्चों को मोबाइल से
. इनडोर के बजाय बच्चों में आउटडोर गेम्स खेलने की प्रवृत्ति विकसित करें।
. बच्चों के सामने मोबाइल का उपयोग कम करें।
. बच्चों को गुस्से वाले गेम खेलने या वीडियो देखने से रोके।
. बच्चे की काउंसलिंग जरूर करवाएं तथा सोशल होना सिखाएं।

Published on:
16 Jun 2022 11:43 am
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