धर्मसभा में बोले मुनि: 'सुख में अटकने वाला शांति से दूर हो जाता है, गुरु चरणों में ही असली सुकून'
वस्त्रनगरी रविवार को उस समय पूर्णतः भक्ति के रंग में सराबोर हो गई। जब मुनि आदित्य सागर ससंघ का मंगल प्रवेश हुआ। नगर विकास न्यास से लेकर आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर तक का मार्ग जयकारों से गूंज उठा। ऐतिहासिक स्वागत के दौरान कहीं ड्रोन से पुष्प वर्षा हुई तो कहीं जेसीबी से फूलों की बारिश कर मुनिश्री की अगवानी की गई।
तरणताल परिसर में आयोजित धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि आदित्य सागर ने जीवन के मर्म को समझाते हुए कहा कि जिंदगी में सुख के साथ शांति का होना सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति सुख में अटक जाता है, वह शांति से कोसों दूर हो जाता है। वास्तविक शांति तो केवल भगवान और गुरु के चरणों में ही संभव है।
मुनि ने वर्तमान जीवनशैली पर कटाक्ष करते हुए कहा कि पुराने समय में लोगों के पास साधन सीमित थे, फिर भी वे सुखी थे। आज सब कुछ होने के बावजूद मन अशांत है। उन्होंने शांति प्राप्ति के तीन सूत्र बताए। शरणागति: भगवान और गुरु के प्रति पूर्ण समर्पण। धार्मिकता: जीवन में धर्म का आचरण। आत्मविश्वास: स्वयं पर अडिग भरोसा।
कार्यक्रम के दौरान आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष नरेश गोधा ने आरके कॉलोनी व सकल दिगंबर जैन समाज की ओर से भावना व्यक्त की। उन्होंने मुनिश्री से आग्रह किया कि वर्ष 2026-27 के प्रारंभ में वे आचार्यश्री को साथ लेकर पुनः भीलवाड़ा पधारें और यहां ब्रह्मचारियों को निर्ग्रंथ दीक्षा प्रदान करें।
मुनिश्री की अगवानी के लिए भीलवाड़ा की सड़कों पर जनसैलाब उमड़ पड़ा। इस दौरान आकर्षण का मुख्य केंद्र एनसीसी कैडेट्स, पुलिस बैंड, महिला बैंड, घोड़े और नासिक ढोल थे। पुराने मजदूर चौराहे पर चार जेसीबी और ड्रोन के जरिए आसमान से फूल बरसाए गए। मंदिर के बाहर ड्रोन मुनिश्री के बैनर के साथ आकाश में उड़ता दिखा। मार्ग में आचार्य विद्यासागर की प्रेरणा से संचालित हथकरघा की प्रदर्शनी भी लगाई गई। महिलाएं हाथों में नित्यं, आदित्यं, आनंद व जैनम, जयति शासनम की तख्तियां लिए नृत्य कर रही थीं। पूरे मार्ग को 101 स्वागत द्वारों से सजाया गया था। सीएल गुप्ता ने शंखनाद किया।
मंदिर के सामने 108 कलशों से मुनि आदित्य सागर, मुनि अप्रमित सागर एवं मुनि सहज सागर का पाद प्रक्षालन किया। मुनिश्री ने हाइड्रोलिक स्टेज से विशाल जनसमूह को अपना आशीर्वाद प्रदान किया। गुलाब चंद, मनीष और नीरज शाह ने पाद प्रक्षालन किया। बसंतीलाल, सुशील और मनोज पाटनी (कोटा) ने शास्त्र भेंट किए, जबकि आरती सचिन जैन (किशनगढ़) ने की। पांडाल का उद्घाटन चांद देवी व नरेश गोधा ने किया। पुनम कोठारी के सानिध्य में जैन पाठशाला के बच्चों ने भी मंच पर गुब्बारों के साथ नृत्य किया।