negligence in bhilwara भीलवाड़ा जिले में स्थित बांधों और तालाबों की हालत खस्ता है। पिछले दस साल से इनकी विभाग ने कोई सुध नहीं ली और न ही मरम्मत हुई। मानसून दो माह बाद दस्तक दे देगा, लेकिन बांधों और तालाबों के रखरखाव की तैयारी सिर्फ कागजों में है।
जयप्रकाश सिंह
negligence in bhilwara भीलवाड़ा जिले में स्थित बांधों और तालाबों की हालत खस्ता है। पिछले दस साल से इनकी विभाग ने कोई सुध नहीं ली और न ही मरम्मत हुई। मानसून दो माह बाद दस्तक दे देगा, लेकिन बांधों और तालाबों के रखरखाव की तैयारी सिर्फ कागजों में है। एक दशक में बांधों और तालाबों की मरम्मत के नाम पर केवल उनके गेट पर ऑयल.ग्रीस का काम हुआ जबकि कई बांध और तालाब को खासी मरम्मत की दरकार है।negligence in bhilwara
दो सालों से कोरोना महामारी के कारण गेटं पर ऑयल.ग्रीस तक के लिए पैसा नहीं मिला। बरसों पूर्व जलाशयों के निर्माण के बाद उन्हें एक तरह से लावारिस हॉलत में छोड़ दिया गया है। जल संसाधन विभाग और पंचायत राज विभाग यह मान बैठा है कि कमजोर मानसून से जलाशयों में पानी की आवक नहीं होगी। लेकिन अतिवृष्टि होने पर बांधों और तालाबों की पाल को संभालना भारी पड़ सकता है। जिले में 638.99 मिलीमीटर बरसात का औसत है। इसके मुकाबले गत वर्ष 523 मिलीमीटर बरसात हुई, जो कि औसत का 81.73 प्रतिशत था। जल संसाधन विभाग विभाग अपने कार्य के प्रति कितना सजग है कि जिले के जलाशयों की मरम्मत के लिए 80 करोड़ रुपए का प्रस्ताव बनाकर अब मुख्यालय भेज रहा हैं, जबकि मानसून काल में जलाशयों की मरम्मत ही संभव नहीं है। राजस्थान पत्रिका ने बुधवार को जिले के जलाशयों के हालात और विभागीय बजट की स्थिति देखी तो कई चौकाने वाले हालात सामने आए।
जिले मे 443 तालाब और बंाध
जिले में जल संसाधन विभाग के पास 60 बांध तथा पंचायतों के अधीन छोटे.बड़े 383 बांध और तालाब है। पूर्व में सभी जलाशय जल संसाधन विभाग के पास थे, लेकिन उचित रखरखाव नहीं होने के कारण पंचायतों को सौप दिए गए, लेकिन इनकी स्थिति जस की तस रही। राज्य सरकार ने 300 हैक्टेयर तक सिंचाई क्षमता वाले बांधों को पंचायतों को सौंप रखे हैं। बांध सौंपने के बाद जल संसाधन विभाग ने इनकी देखरेख से मुंह मोड़ लिया। जल संसाधन विभाग अपने जलाशयों की सुध ले रहा है ना ही पंचायत। हालत यह है कि थोड़ी सी बरसात में ही अधिकांश तालाबों की पाळ पर रिसाव होना शुरू हो जाता है।
बजट का अभाव
जलाशयों के रखरखाव की ओर ध्यान नहीं देने का बड़ा कारण बजट का अभाव है। विभाग हर साल बांधों और तालाबों की मरम्मत के लिए बड़ी राशि मांगता है, लेकिन उसके अनुरूप बजट नहीं मिलता। जो बजट मिलता है, उससे बांधों के गेट पाल पर ऑयल.ग्रीस से ज्यादा कुछ नहीं होता। पंचायतों के भी कुछ इसी तरह के हालात है। हर साल जल संसाधन विभाग रखरखाव के लिए पचास करोड़ का बजट मांगता है। इस बार भी 80 करोड़ रुपए का बजट प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा जा रहा है।
इनका कहना है
बरसात पूर्व जलाशयों के रखरखाव के लिए बजट मांगा जाता है। हालांकि पूरा बजट नहीं मिल पाता। फि र भी कोशिश करते है कि उनका उचित रखरखाव हो सकें। इस बार भी प्रस्ताव बनाकर मुख्यालय भेजा जा रहा है।
- सतपाल मीना, अधीक्षण अभियंता, जल संसाधन विभाग
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फैक्ट फाइल
जल संसाधन विभाग के अधीन 60 बांध
पंचायतों को सौंपे 383 जलाशय
सुध नहीं ली 10 साल से
मरम्मत की दरकार एक दर्जन जलाशय