एनजीटी का फैसला यथावत रखा: कहा-तालाब से हटाएं अवैध निर्माण, दोषी सरपंच से वसूले 2 करोड़ जुर्माना
सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश सजय खन्ना व दीपाकर दत्ता की बैंच ने रायला के धर्म तालाब को मूल स्वरूप लौटाने, तालाब से अवैध अतिक्रमण हटाने एवं दोषी सरपंच पर 2 करोड़ रुपए के जुर्माने के एनजीटी के आदेश को यथावत रखा है। एनजीटी के आदेश के विरूद्ध रायला सरपंच गीता देवी जाट व उसके पति जगदीश जाट की अपील खारिज कर दी। शीर्ष न्यायालय ने एनजीटी के फैसले को उचित मानते इसमें हस्तक्षेप से इनकार कर दिया।
एनजीटी ने रायला के ओमप्रकाश सोमानी की याचिका पर रायला के धर्म तालाब में निर्माण ध्वस्त करने व सरपंच गीता जाट व पति जगदीश जाट को दोषी मानते हुए 2 करोड रुपए का जुर्मना लगाया था। तालाब को मूल स्थिति में लाने का 24 जुलाई 2023 को आदेश दिया था। इसमें तालाब से अतिक्रमण हटाने, पुलिया निर्माण में हुए राजकोष की हानि को सबंधित अधिकारियों एवं कार्यकारी एजेंसी से वसूलने, तालाब की भूमि पर हुए निर्माण कार्यों को तीन माह में ध्वस्त करने, जिला कलक्टर के निर्देशन में कमेटी गठित कर तालाब का मूल स्वरूप लौटाने। राशि वसूल करने के साथ ही जिला कलक्टर की ओर से अनुपालना रिपोर्ट रजिस्ट्रार, सेंट्रल जोन, भोपाल बेच को 6 माह में 15 फरवरी 2024 से पहले पेश करने का आदेश दिया था।
याचिकाकर्ता सोमानी ने अपने अधिवक्ता दीक्षा चतुर्वेदी के माध्यम से एनजीटी में धर्म तालाब को मूल स्वरूप में लौटाने के लिए अवमानना याचिका भी प्रस्तुत कर रखी है। तालाब पेटे में अवैध रूप से सड़कें बनी है। तालाब की भूमि में पट्टे जारी किए हैं। पेट्रोल पम्प व समारोह स्थल बना हुआ है। न्यायालय एवं एनजीटी के फैसले का स्वागत करते हुए पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कहा कि इससे जील जलाशयों का संरक्षण होगा।