पर्यावरण और कानून की उड़ रही धज्जियां, शिकायत के बाद पहुंचा प्रशासन, कार्रवाई के नाम पर 'कोर्ट स्टे' का बहाना
भीलवाड़ा जिले के कोटड़ी क्षेत्र में हुए रूह कंपा देने वाले कोयला भट्टी कांड के बाद भी जिला प्रशासन और वन विभाग गहरी नींद में सोया है। प्रशासन की इसी लापरवाही के चलते बनेड़ा तहसील क्षेत्र में आज भी अवैध कोयला भट्टियों का काला कारोबार जारी है। बामणिया गांव में माफिया ने करीब 200 बीघा चरागाह जमीन को पूरी तरह से साफ कर दिया है और बिलायती बबूल, नीम व केर के हरे पेड़ों को काटकर कोयले की भट्टी में झोंक दिया गया है।
शिकायत मिलने के बाद प्रशासन और प्रदूषण नियंत्रण मंडल की एक संयुक्त टीम ने क्षेत्र का दौरा तो किया, लेकिन मौके पर भट्टियां सुलगती मिलने के बावजूद ठोस कार्रवाई के बजाय 'न्यायालय के स्थगन' (कोर्ट स्टे) की व्याख्या करने का बहाना बनाया जा रहा है।
शिकायतकर्ता ने जांच टीम को मौके पर ले जाकर हकीकत दिखाई। टीम को बताया गया कि आज भी क्षेत्र के निम्बाहेड़ा कलां और भटेरा गांव में 70 से 80 अवैध कोयले की भट्टियां दिन-रात धधक रही हैं। जांच टीम ने जब मौका मुआयना किया, तो इन भट्टियों के पास बड़ी मात्रा में तैयार कोयला पड़ा मिला। आस-पास की चरागाह और सरकारी जमीनों को निशाना बनाकर हरियाली को नष्ट किया जा रहा है।
जिला कलक्टर जसमीत सिंह संधू के निर्देश पर इस पूरे मामले की जांच के लिए एक संयुक्त टीम गठित की गई थी। टीम में बनेड़ा उपखंड अधिकारी श्रीकांत व्यास, रेंजर संजय शर्मा, बनेड़ा तहसीलदार, राजस्थान राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक धनेटवाल और अधीक्षण वैज्ञानिक अधिकारी महेश सिंह शामिल थे।
अवैध कोयला भट्टियों को लेकर भीलवाड़ा जिला प्रशासन पर सवाल इसलिए उठ रहे हैं क्योंकि इन्ही भट्टियों की आड़ में जिले ने राजस्थान का सबसे जघन्य अपराध देखा है।
2 अगस्त 2023 को कोटड़ी थाना क्षेत्र के नरसिंहपुरा गांव में एक दिल दहला देने वाली वारदात हुई थी। एक 15 वर्षीय नाबालिग बच्ची के साथ दरिंदों ने सामूहिक दुष्कर्म किया। गैंगरेप के बाद बच्ची की हत्या कर दी गई और सबूत मिटाने के इरादे से उसके शव को अवैध रूप से चल रही कोयले की धधकती भट्टी में डाल दिया गया था। इस मामले में त्वरित सुनवाई करते हुए मई 2024 में पोक्सो कोर्ट ने ऐतिहासिक फैसला सुनाया और मुख्य आरोपियों को फांसी की सजा मुकर्रर की। इतने बड़े और वीभत्स कांड के बावजूद जिले में अवैध कोयला भट्टियों का दोबारा पनपना और 200 बीघा जमीन से पेड़ों का सफाया होना, प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर रहा है।
इस मामले को लेकर संयुक्त टीम ने मौके का निरीक्षण किया था। जांच के दौरान कई भट्टियां अब भी चलती हुई पाई गई हैं। हालांकि, इस मामले में न्यायालय से स्थगन (स्टे) मिला हुआ है। फिलहाल हम उस आदेश की कानूनी व्याख्या कर रहे हैं, जिसके स्पष्ट होने के बाद ही आगे की कार्रवाई की जाएगी।
संजय शर्मा, रेंजर वन विभाग