
प्रदेश के उन राजकीय विद्यालयों में, जहां भवन असुरक्षित या जर्जर होने के कारण बच्चों की पढ़ाई खुले में हो रही है, अब उन्हें तत्काल राहत मिलेगी। राजस्थान उच्च न्यायालय ने इस पर सख्त रुख अपनाते हुए निर्देश दिया है कि 24 घंटे के भीतर सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, अन्य सरकारी भवन या समीपस्थ विद्यालय में दो पारियों में पढ़ाई कराकर बच्चों को सुरक्षित बैठने की व्यवस्था की जाए।
न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि इस व्यवस्था की वास्तविक स्थिति जानने के लिए प्रत्येक जिले में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की टीम विद्यालयों का सैम्पल सर्वे करेगी। यह सर्वे 15 से 18 सितंबर के बीच होगा और इसकी रिपोर्ट 19 सितंबर को अगली सुनवाई से पहले अदालत में प्रस्तुत की जाएगी।
शिक्षा निदेशक ने दिए आदेश
माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया है कि जहां विद्यार्थी खुले में बैठकर पढ़ाई कर रहे हैं, वहां प्राथमिकता से सामुदायिक भवन, पंचायत भवन, अन्य राजकीय भवन अथवा समीपस्थ विद्यालय में वैकल्पिक व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। साथ ही सर्वे करने आने वाली टीम को पूर्ण सहयोग प्रदान किया जाए।
अब और लापरवाही नहीं
अदालत ने आदेश की गंभीरता पर जोर देते हुए कहा कि बच्चों की पढ़ाई व सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जा सकता। इसलिए अधिकारियों को आदेश की गंभीरता और प्राथमिकता से अनुपालना करनी होगी।
छात्रों को मिलेगी राहत
अब विद्यार्थियों को धूप, बारिश और असुरक्षित भवनों की परेशानी से निजात मिलेगी। अभिभावकों का मानना है कि न्यायालय का यह कदम बच्चों की पढ़ाई और सुरक्षा दोनों के लिए महत्वपूर्ण है।