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भीलवाड़ा ।
बस व ट्रक बॉडी निर्माण कार्य पर जीएसटी की दर २८ प्रतिशत होने से यह उद्योग बन्द होने के कगार पर है। जबकि बॉडी बनाने के काम आने वाले कच्चे माल पर जीएसटी १८ तथा इसका काम करने वाले मजदूरों पर भी जीएसटी १८ प्रतिशत है। ऐसे में इस तरह के छोटे उद्योगों पर १० प्रतिशत की अतिरिक्त भार पड़ रही है। इस तरह का राजस्थान में सबसे अधिक कारखाने भीलवाड़ा में संचालित है। इन सभी उद्योगों में काम करने वाले मजदूरों के सामने रोजगार का संकट भी खड़ा हो गया है।
जीएसटी से पहले राजस्थान में बस एवं ट्रक बॉडी निर्माण कार्य में वैट ५.५ प्रतिशत था। इस पर एक्साइज ड्यूटी भी नहीं लगती थी। अब जीएसटी के तहत बस व ट्रक बॉडी निर्माण कार्य को एचएसएन कोड नम्बर ८७०७ में ले लिया गया। इससे इसकी दर सबसे अधिक २८ प्रतिशत है। लघु उद्योग भारती के अध्यक्ष संजीव चिरानिया ने केन्द्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली को पत्र लिखकर इस उद्योग को जीएसटी में राहत देने की मांग करते हुए इसकी दर १८ प्रतिशत करने की मांग की है। चिरानिया ने बताया कि देश में ट्रक एवं बस बॉडी निर्माण कार्य सबसे ज्यादा राजस्थान में होता है। इस कार्य में पूरे राज्य के शहरों एवं गांवों में लघु एवं मध्यम उद्योग के रूप में यह कार्य होता है। इसमें अधिकतर उद्यमी आर्थिक दृष्टि से कमजोर एवं अन्य पिछड़ा वर्ग से है। इसमे कार्यरत मजदूर लाखों की तादाद में कार्य करते है जो कि अशिक्षित व मध्यम है जो अधिकतर अन्य पिछड़ा वर्ग से अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति श्रेणी से है।
जीएसटी की दर २८ प्रतिशत होने से यह उद्योग मंदी व आर्थिक संकट से जूझ रहा है। तथा यह उद्योग बंद होने के कगार पर है। ऐसे में इस तर के उद्योगों में काम करने वाले मजदूर भी बेरोजगार होने की हालात है। उन्होंने इस लघु उद्योगों को बन्द होने से बचाने व मजदूरों को बेरोजगार होने से बचाने के लिए बस एवं ट्रक बॉडी निर्माण कार्य पर जीएसटी दर को 18 प्रतिशत के स्लेब में लेने की मांग की है।