
भीलवाड़ा।
केन्द्र सरकार की ओर से देना बैंक व विजया बैंक का बैंक ऑफ बड़ौदा (बीओबी) में विलय प्रस्ताव का सभी बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों ने विरोध करते हुए बुधवार को एक दिन की हड़ताल की। हड़ताल से जिले के 184 बैंकों में काम-काज नहीं होने से करीब 800 करोड़ का कारोबार तक प्रभावित हुआ। सरकारी बैंकों के कर्मचारियों ने बुधवार को बसंत विहार स्थित स्टेट बैंक ऑफ इंडिया के रीजनल कार्यालय के बाहर नारेबाजी कर प्रदर्शन किया।
जिले में सरकारी बैंकों की 184 शाखाओं में बैंकिंग कामकाज नहीं हुआ। हालांकि सरकारी बैंकों के अलावा प्राइवेट व सहकारी बैंक में रोज मर्रा की तरह काम-काज हुआ। इससे इन बैंकों में खाता रखने वाले लोगों के लेनदेन पर कोई असर नहीं पड़ा। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन्स के बैनर तले सभी बैंक अधिकारी व कर्मचारी सरकार के इस प्रस्ताव का विरोध कर रहे हैं। बसंत विहार स्थित एसबीआइ कार्यालय के बाहर सुबह साढ़े ग्यारह बजे सभी अधिकारी-कर्मचारी एकत्र हुए और नारेबाजी की। हड़ताल के कारण बैंक शाखाओं के ताले भी नहीं खुले।
एसबीआइ-एसए उदयपुर अंचल के उप महासचिव अजयकुमार गुप्ता ने बताया कि सरकार एवं यूनाइटेड फोरम के पदाधिकारियों के बीच वार्ता के 2-3 दौर भी चले, लेकिन समाधान नहीं निकल पाया। तब मजबूर होकर एक दिवसीय हड़ताल का आव्हान किया गया। इसके पश्चात भी 21 दिसंबर को दिल्ली में मुख्य श्रम आयुक्त के माध्यम से कर्मचारी व अधिकारी संगठनों के साथ-साथ आइबीए व सरकार के प्रतिनिधियों को हड़ताल टालने के लिए बैठक बुलाई थी। यहां पर भी आइबीए की हठधर्मिता बनी रही।
प्रदर्शन में ये थे शामिल
प्रदर्शन के दौरान एसबीआइ-एसए उदयपुर अंचल के सहायक महासचिव अशोक हेमनानी, क्षेत्रीय सचिव सुनील पारीक, तरुण सिंह, विजयसिंह राजेंद्र गौड़, आरपीबीइयू संरक्षक सुरेन्द्रकुमार जैन, आरपीबीइयू अध्यक्ष जीवनराम डुकिया, सचिव दिलीप पारख, एनसीबीइ सूर्यप्रकाश तिवारी, किशोरदास तिलवानी, जेपी भाटिया, ललित जीनगर, जेके पारख, संदीप खेतान, शिवकुमार सोडानी, अशोककुमार बिड़ला, रमेश मेहता, लोकेश हाड़ा, बुद्धिप्रकाश राव, ईश्वर मंगलानी आदि उपस्थित थे।