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भीलवाड़ा नगर निगम में पहली महापौर बनेगी महिला, कांग्रेस का 8 तो BJP का 6 बार रहा कब्जा; क्रॉस वोटिंग भी रही चर्चा में

जयपुर में निकली आरक्षण लॉटरी से भीलवाड़ा की राजनीति गरमा गई है। नगर निगम बनने के बाद पहली बार कमान महिला महापौर संभालेगी। वहीं, 11 साल बाद जिला प्रमुख पद अनारक्षित होने से भाजपा-कांग्रेस में हलचल तेज है। 45 सीटों वाली जिला परिषद में अब तक 8 बार कांग्रेस और 6 बार भाजपा का कब्जा रहा है।
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bhilwara civic polls

भीलवाड़ा में 3 लाख से अधिक वोटर चुनेंगे निगम की पहली सरकार (फोटो पत्रिका नेटवर्क)

भीलवाड़ा: जयपुर में निकली निकायों की आरक्षण लॉटरी ने भीलवाड़ा के सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है। नगर निगम बनने के बाद पहली बार कमान महिला महापौर के हाथ में होगी। करीब आठ साल के लंबे इंतजार के बाद एक बार फिर शहर की सरकार की बागडोर मातृशक्ति संभालेगी। लॉटरी के नए गणित ने जहां सालों से राजनीति में धाक जमाए बैठी महिला नेत्रियों के चेहरे चमका दिए, वहीं आरक्षण के बदले समीकरण ने महापौर और नगर पालिका अध्यक्ष पद का सपना देख रहे दिग्गज पुरुष दावेदारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

वहीं, दूसरी तरफ चार नवगठित नगर पालिकाओं में पहली बार अध्यक्ष के चुनाव होने जा रहे हैं। जबकि पुरानी छह नगर पालिकाओं में इस बार अध्यक्ष की कुर्सी के चुनाव के आरक्षण के बदले समीकरण ने राजनीतिक हलकों में सरगर्मी बढ़ा दी है। महापौर व नगर पालिकाध्यक्षों की आरक्षण लॉटरी निकलने के साथ ही सियासी गलियारों व वार्डों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। निगाह अब 17 अगस्त को निकाय के वार्ड आरक्षण को लेकर निकाली जाने वाली लॉटरी पर टिक गई है।

तीसरी बार महिला आरक्षण

भीलवाड़ा नगर परिषद-निगम के 75 साल के कार्यकाल में सभापति के बोर्ड पर 27 जनप्रतिनिधियों का नाम लिखा गया। इसमें पांच बार सभापति की कमान महिला जनप्रतिनिधियों के हाथ रही। पहली महिला सभापति 29 अगस्त 1995 को मधु जाजू चुनी गई थीं। उन्हें अपने कार्यकाल में एक बार सभापति की कुर्सी छोड़नी पड़ी, लेकिन वह दोबारा फिर से कुर्सी पर काबिज हुईं।

करीब दस साल बाद नगर परिषद सीट फिर महिला वर्ग के लिए आरक्षित हुई और ललिता समदानी सभापति बनीं। लेकिन पांच साल के इस बोर्ड में कई बार राजनीतिक घटनाक्रम बदले। समदानी को एक बार कुर्सी छोड़नी पड़ी, लेकिन वह वापस काबिज हुई। इसी बोर्ड में दीपिका कंवर, मंजू पोखरना और मंजू चेचाणी को भी सभापति रहने का मौका मिला।

तीन लाख से अधिक वोटर

भीलवाड़ा नगर परिषद का कद सितंबर 2024 में बढ़कर नगर निगम हुआ। यहां 70 वार्ड के लिए अब करीब तीन लाख से ज्यादा वोटर हैं। वहीं, जिले के निकायों में पांच साल में वार्डों की संख्या भी 235 से बढ़कर 325 हुई। यानी 90 वार्ड बढ़े हैं। वहीं, कुल मतदाता की संख्या भी 3 लाख 67 हजार 940 से बढ़कर 4 लाख 38 हजार 943 हुई है। यानी पांच साल में निकाय चुनाव के वोटर की संख्या भी 71 हजार 003 बढ़ी है। मतदाता पुर्नरीक्षण कार्यक्रम अभी भी जिले में जारी होने से मतदाताओं का आंकड़ा साढ़े चार लाख पहुंचने की संभावना है। वर्ष 2024 में सभापति के बजाय महापौर पद की शुरुआत हुई।

जिला प्रमुख की कुर्सी फिर अनारक्षित, भाजपा-कांग्रेस में बिछने लगी बिसात

भीलवाड़ा जिले की सियासत में एक बार फिर नया मोड़ आया है। पूरे 11 साल के लंबे इंतजार के बाद जिला प्रमुख का पद अनारक्षित वर्ग के लिए आरक्षित हुआ है। आरक्षण की लॉटरी निकलने के साथ सत्ताधारी भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के खेमों में राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। सीट अनारक्षित होने से सभी वर्गों के दिग्गजों के लिए जिला प्रमुख बनने के रास्ते साफ हो गए हैं। इसके चलते टिकट के दावेदारों ने अभी से जोर-आजमाइश शुरू कर दी है।

भाजपा उत्साहित, कांग्रेस की नजर वापसी पर

पंचायतीराज में आरक्षण लागू होने के बाद से जिला प्रमुख पद पर भाजपा की स्थिति बेहद मजबूत रही। पिछले दो कार्यकाल से लगातार भाजपा का जिला प्रमुख काबिज रहा है। 37 सीटों वाली निवर्तमान जिला परिषद में भाजपा के पास 24 सदस्यों का स्पष्ट बहुमत था, जबकि कांग्रेस 13 पर सिमट गई थी। बीते पांच सालों में हुए दो उपचुनावों में भी भाजपा ने जीत दर्ज कर अपनी सीटें बरकरार रखीं। अब बदले हुए परिसीमन में कुल 45 सीटों पर होने वाले चुनाव दोनों दलों के लिए थोड़ा कठिन होंगे। जिला परिषद क्षेत्र में आने वाले वार्डों में कुल 17 लाख 91 हजार 706 की आबादी है।

क्रॉस वोटिंग का भी इतिहास

जिला परिषद का इतिहास सियासी उलटफेर का भी गवाह रहा। वर्ष 2005 से 2010 के कार्यकाल के दौरान परिषद में कांग्रेस के पास 20 सदस्यों के साथ बहुमत था और भाजपा के पास केवल 17 सदस्य थे। इसके बावजूद, कांग्रेस खेमे में हुई जबरदस्त क्रॉस वोटिंग का फायदा उठाते हुए भाजपा के इंजीनियर कन्हैयालाल धाकड़ जिला प्रमुख बनने में कामयाब रहे थे।

कांग्रेस 8 बार, तो भाजपा 6 बार काबिज

आजादी के बाद से लंबे समय तक जिला प्रमुख के पद पर कांग्रेस का राज रहा, लेकिन 90 के दशक के बाद भाजपा ने गहरी सेंधमारी की। 66 वर्षों के इतिहास में अब तक कुल 14 जिला प्रमुख चुने गए। इनमें से 8 बार कांग्रेस जबकि 6 बार यह पद भाजपा की झोली में गया।

फरवरी 1995 में डॉ. रतनलाल जाट भाजपा के पहले जिला प्रमुख बने। इसके बाद इंजीनियर कन्हैयालाल धाकड़, पीरचंद सिंघवी, रामचंद्र सेन, शक्ति सिंह हाड़ा और बरजीबाई भील (लगातार दूसरी) ने भाजपा का परचम लहराया। अब अनारक्षित सीट होने के कारण इस बार का चुनाव न केवल जातिगत समीकरणों बल्कि व्यक्तिगत प्रभाव और भीतररघात रोकने की क्षमता पर निर्भर करेगा। परिसीमन के बाद बढ़ी हुई 8 नई सीटें किस करवट बैठेंगी, यह देखना दिलचस्प होगा।

एक नजर आंकड़ों पर

संस्थासंख्या
जिला परिषद वार्ड45
निकाय वार्ड325
निकाय मतदान केंद्र520
नगर निगम01
नगर पालिका10
पंचायत समिति16
ग्राम पंचायत511
पंचायत मतदान बूथ1741

भीलवाड़ा निकाय चुनाव पर एक नजर

नगरीय निकायवार्डआरक्षित वर्गमतदाता
भीलवाड़ा नगर निगम70महिला अनारक्षित2,92,891
नगर पालिका शाहपुरा35अनारक्षित23,152
नगर पालिका गुलाबपुरा35अनारक्षित महिला21,373
नगर पालिका आसींद25अनारक्षित16,100
नगर पालिका गंगापुर25अनारक्षित महिला14,157
नगर पालिका कोटड़ी25अनारक्षित13,587
नगर पालिका बिजौलिया25अनारक्षित महिला12,991
नगर पालिका जहाजपुर25अनारक्षित महिला16,395
नगर पालिका मांडलगढ़20अनारक्षित महिला10,881
नगर पालिका हमीरगढ़20ओबीसी8,912
नगर पालिका बनेड़ा20सामान्य8,504
कुल3254,38,943