वैश्विक स्तर पर चल रहे अमेरीका-इजरायल और ईरान संकट का सीधा असर वस्त्रनगरी के टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों का निर्यात पूरी तरह से ठप होने के बाद अब यहां के कपड़ा व्यापारियों ने हार मानने के बजाय नए देशों की तलाश कर ली है। निर्यातकों ने इजिप्ट (मिस्र) को […]
वैश्विक स्तर पर चल रहे अमेरीका-इजरायल और ईरान संकट का सीधा असर वस्त्रनगरी के टेक्सटाइल उद्योग पर पड़ा है। युद्ध के कारण खाड़ी देशों का निर्यात पूरी तरह से ठप होने के बाद अब यहां के कपड़ा व्यापारियों ने हार मानने के बजाय नए देशों की तलाश कर ली है। निर्यातकों ने इजिप्ट (मिस्र) को मुख्य केंद्र बनाते हुए अब अफ्रीकी देशों का रुख किया है। इससे भीलवाड़ा के कपड़ा उद्योग को एक बड़ी राहत मिली है।
ईरान पर हमलों के कारण चाबहार पोर्ट को भारी नुकसान पहुंचा और उसे बंद करना पड़ा। इससे 100 करोड़ रुपए से अधिक का कपड़ा निर्यात सीधे तौर पर अटक गया। वहीं, खाड़ी देशों में होने वाला करीब 600 करोड़ का सालाना व्यापार भी पूरी तरह ठप हो गया था। खाड़ी देशों का विकल्प तलाशते हुए निर्यातकों ने अब दक्षिण अफ्रीकी महाद्वीप के देशों पर फोकस किया है। इनमें केन्या, मोरक्को, तंजानिया, युगांडा और मेडागास्कर शामिल हैं। नए बाजारों में पैठ बनाने के लिए निर्यातकों ने वहां नए सेंटर स्थापित किए हैं और स्थानीय एजेंटों की मदद से कपड़े और यार्न का शिपमेंट भेजना शुरू कर दिया है।
लगातार हो रहे हमलों और तनाव के कारण वस्त्रनगरी के निर्यातक भारी चिंता में थे। मिडल-ईस्ट (खाड़ी देशों) के बाजार बंद होने से फैक्ट्रियों में माल डंप होने का खतरा मंडरा रहा था। हालांकि, इन नए अफ्रीकी बाजारों में अभी कितने करोड़ का कपड़ा और यार्न जा रहा है, इसका सटीक आंकड़ा आना बाकी है। लेकिन, निर्यातकों का मानना है कि नए रास्तों और सेंटर्स की इस खोज से भीलवाड़ा के टेक्सटाइल उद्योग को एक नई संजीवनी मिलेगी और विदेशी मुद्रा का प्रवाह फिर से सुचारू हो सकेगा।