भीलवाड़ा

होली खेले लेकिन सावधानी से

नहीं तो हो सकता अस्थमा अटैक
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Updated: 27 Mar 2021, 10:22 AM IST
होली खेले लेकिन सावधानी से
होली खेले लेकिन सावधानी से

भीलवाड़ा।
होली का त्योहार रविवार व सोमवार को है। रंगों का त्योहार है तो रंगों से परहेज करना मुश्किल होता है। रंगों का त्यौहार अस्थमा मरीजों के लिए परेशानियों का सबब बन सकता है। रंगों में मौजूद हानिकारक तत्वों से अस्थमा के मरीजों की परेशानी बढ़ सकती है। होली का रंग अस्थमा के मरीज के मुंह में चले जाएं तो उसे अस्थमा का अटैक आ सकता है। होलिका दहन से भी सांस के मरीजों की परेशानी बढ़ जाती है। होलिक दहन से उठने वाला धुंआ और राख हवा में घुल जाता है और ये राख के कण फेफड़ों में प्रवेश कर अस्थमा के मरीजों की सांस लेना दूभर कर देते हैं। होली के दौरान इस्तेमाल होने वाले रंगों में मौजूद केमिकल और केरोसिन युक्त रंगों की गंध से अस्थमा अटैक आ सकता है। एमजीएच अधीक्षक डॉ. अरुण गौड़ का कहना है कि अस्थमा के मरीजों को चाहिए कि वो होली के दिन सावधानी बरतें। मास्क लगाकर ही होली दहन में हिस्सा लें। मास्क हवा में मौजूद धूल के कणों को फेफड़ों में जाने से रोकेगा।
गौड़ का कहना है कि अस्थमा के मरीज सूखे रंगों से होली खेलने से परहेज करें। सूखे रंग में मौजूद कण हवा में रहते है। इससे ये मरीज के फेफड़ों में प्रवेश करके सांस लेने में परेशानी पैदा करते हैं। होली के लिए नेचुरल रंगों का उपयोग करें। कैमिकल बेस रंगों से अस्थमा का खतरा बना रहता है। लेकिन नेचुरल रंगों से अस्थमा के मरीजों को कम नुकसान होता है।

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