प्रदूषण नियंत्रण मंडल ने पुलिस अधीक्षक को लिखा पत्र
भीलवाड़ा टेक्सटाइल सिटी में प्रोसेस हाउस संचालकों की ओर से काफी हद तक नवाचार करने के बाद भी कुछ प्रोसेस हाउस संचालक दूषित पानी को उपचारित किए बिना ही टैंकरों के माध्यम से नदियों व जगलों में छोड़ रहे हैं। राजस्थान प्रदूषण नियंत्रण मंडल को लगातार इसकी शिकायतें मिल रही हैं, लेकिन वह टैंकरों को पकड़ नहीं पा रहे हैं। ऐसे में अब मंडल ने भीलवाड़ा के पुलिस अधीक्षक को पत्र लिखकर ऐसे टैंकर चालकों को पकड़ कर कार्रवाई करने को कहा है।
वस्त्रनगरी में 25 से अधिक प्रोसेस हाउस संचालित हैं। प्रोसेस हाउसों ने कपड़ा प्रोसेस के बाद निकलने वाले दूषित व केमिकल युक्त पानी के उपचार के लिए नवाचार किए हैं। लेकिन कुछ प्रोसेस हाउस संचालक जो सूतीकपड़े का प्रोसेस कर रहे हैं वह दूषित पानी को ईटीपी में ट्रीट करके पानी को टैंकरों के माध्यम से बाहर छोड़ रहे हैं।
ताजा पानी की पड़ती है जरूरत
सूतीकपड़ा प्रोसेस करने के लिए ताजा पानी की जरूरत पड़ती है। सूतीकपड़ों को रंगने के लिए पानी का उपयोग ज्यादा होता है, जो कपड़ों को मजबूत, नरम और अधिक रंगीन बनाता है। इस दूषित पानी को रिसाइकिल नहीं करते हैं। क्योंकि यह पानी पुन: काम में नहीं आता है। इसके कारण कॉटन कपड़े का प्रोसेस करने वाले प्रोसेस हाउस संचालक उस पानी को बाहर छोड़ रहे हैं। इसके अलावा भी कुछ अन्य प्रोसेस हाउस संचालक चोरी छिपे पानी छोड़ रहे हैं।
यहां लगेंगे छह कैमरे
लॉट लोकेशन-आधारित निगरानी और ट्रैकिंग व पैन-टिल्ट-ज़ूम कैमरा छह जगहों पर लगाए जाएंगे। ताकि कोई भी किसी तरह की हरकत होने पर वह कैमरे में कैद हो जाए। आरएसडब्ल्यूएम व बीएसएल के पीछे रेलवे लाइन के पास, टी पाइंट व रेलवे लाइन ट्रेक, पूजा स्पिनटेक्स, सांवरिया टेक्सफेब के पीछे गुवारड़ी नाला, सोना प्रोसेस के पीछे गुवारड़ी बांध, गुवारड़ी नाला तथा सल्जर व कंचन प्रोेसेस के पास लगाए जाएंगे।
क्या है पैन-टिल्ट-ज़ूम (पीटीजेड) कैमरे
पैन-टिल्ट-ज़ूम (पीटीजेड) कैमरे यांत्रिक भागों के साथ उन्हें बाएं से दाएं घुमाने, ऊपर और नीचे झुकाने और किसी दृश्य को ज़ूम इन और आउट कर आसानी से देखा जा सकता है। यह आम तौर पर 180- या 360-डिग्री दृश्य की आवश्यकता वाले व्यापक खुले क्षेत्रों की निगरानी आसानी से कर सकते हैं। कैमरे या सॉफ़्टवेयर के आधार पर इन्हें संचालित किया जाएगा। इस तरह के कैमरे आम तौर पर एक बड़ी घटना की निगरानी के लिए काम में लिए जाते हैं।
पुलिस की ले रहे मदद
कुछ प्रोसेस हाउस संचालक टैंकरों के माध्यम से पानी छोड़ रहे हैं। लेकिन टीम के पहुंचने की सूचना मिलने पर ये लोग टैंकरों को अपने परिसर से बाहर नहीं निकालते हैं। ऐसे में पुलिस की मदद ली जा रही है। वहीं छह जगह को चिन्हित किया जहां पर पैन-टिल्ट-ज़ूम (पीटीजेड) कैमरे लगाए जाएंगे। इसके लिए आरपीसीबी के सदस्य सचिव जयपुर को भी पत्र लिखा है।
दीपक धनेटवाल, क्षेत्रीय अधिकारी आरपीसीबी