बालिका शौचालयों को मिलेगी सर्वोच्च प्राथमिकता, प्रति जिला 9 लाख रुपए का बजट तय, 20 तक भेजने होंगे एस्टीमेट
भीलवाड़ा. प्रदेश के दूरदराज के ग्रामीण इलाकों में स्थित सरकारी स्कूलों की दशा अब जल्द सुधरेगी। शिक्षा विभाग ने ग्रामीण क्षेत्रों के जर्जर स्कूलों और विशेषकर शौचालयों की मरम्मत के लिए विशेष कदम उठाया है। माध्यमिक शिक्षा निदेशक ने इस संबंध में प्रदेश के सभी संयुक्त निदेशकों को तत्काल प्रभाव से प्रस्ताव भिजवाने के सख्त निर्देश जारी किए हैं। विभाग ने साफ कर दिया है कि इस योजना का लाभ केवल ग्रामीण क्षेत्रों को मिलेगा और शहरी स्कूलों के प्रस्ताव इसमें शामिल नहीं किए जाएंगे।
आदेश के अनुसार, प्रदेश के जिन विद्यालयों में शौचालयों की मरम्मत की सख्त आवश्यकता है, उनके प्रस्ताव निदेशालय ने तलब किए हैं। इसमें यह स्पष्ट रूप से निर्देशित किया गया है कि बालिकाओं के लिए शौचालयों के मरम्मत प्रस्तावों को सर्वोच्च प्राथमिकता प्रदान की जाए। इसके अतिरिक्त, जो ग्रामीण विद्यालय जीर्ण-शीर्ण (जर्जर) अवस्था में हैं, उनकी मरम्मत के प्रस्ताव भी भिजवाए जा सकेंगे।
यह बजट केवल दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के स्कूलों के लिए है। आदेश में सख्त हिदायत है कि शहरी क्षेत्र के प्रस्ताव किसी भी सूरत में न भिजवाए जाएं। मरम्मत कार्यों के लिए प्रति जिला अधिकतम 9 लाख रुपए तक के प्रस्ताव ही मांगे गए हैं। किसी भी एक विद्यालय के लिए अधिकतम 2 लाख रुपए तक का ही अनुमानित खर्च स्वीकृत किया जाएगा। जो भी एस्टीमेट तैयार किए जाएंगे, उनका कनिष्ठ अभियंता या सहायक अभियंता से हस्ताक्षरित होना अनिवार्य है।
माध्यमिक शिक्षा विभाग की संयुक्त निदेशक (प्रशासन) अनुसुईया की ओर से जारी इस पत्र में अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि इस कार्य को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए। सभी संयुक्त निदेशकों को अपने प्रस्ताव और तकनीकी अधिकारियों की ओर से सत्यापित एस्टीमेट आगामी 20 अप्रेल तक विभाग की ई-मेल आईडी पर हर हाल में भिजवाने होंगे। इस आदेश के बाद शिक्षा विभाग पूरी तरह से सकर्त हो गया है। जिला शिक्षा अधिकारी माध्यमिक मुख्यालय राजेन्द्र गग्गड़ ने सभी सीबीईओं को निर्देश दिए है कि वे जल्द से जल्द अपने क्षेत्र की स्कूलों की सूची तैयार करके मुख्यालय भिजवाएं ताकी रिपोर्ट आगे भेजी जा सके। इसे लेकर सीबीईओं भी काम में जुट गए है।