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ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती पर भड़के शिक्षक, बोले- ‘मनमर्जी नहीं चलेगी

शिविरा पंचांग पर बवाल: शिक्षक संघ ने छुट्टियों में कटौती को बताया राजस्थान सेवा नियम का उल्लंघन

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Teachers furious over 10-day summer vacation cut, say 'arbitrariness will not be tolerated'

ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती पर भड़के शिक्षक, बोले- 'मनमर्जी नहीं चलेगी

शिक्षा निदेशालय की ओर से हाल ही जारी किए गए नए शिविरा पंचांग को लेकर शिक्षा विभाग में बवाल मचा हुआ है। पंचांग में शिक्षकों के ग्रीष्मकालीन अवकाश में 10 दिन की कटौती करने सहित अन्य छुट्टियों को कम करने के फैसले का कड़ा विरोध चल रहा है। शिक्षक संगठनों ने इसे राजस्थान सेवा नियम 1951 का खुला उल्लंघन और गैर-वैधानिक करार दिया है। शिक्षकों ने चेतावनी दी है कि यदि नियमों की अनदेखी कर छुट्टियां काटी गईं, तो प्रदेश के 3.5 लाख शिक्षक सड़क से लेकर कोर्ट तक आंदोलन करेंगे। शिक्षक संघ शेखावत भीलवाड़ा के जिलाध्यक्ष सत्यनारायण शर्मा ने बताया कि शिक्षा निदेशालय ने बिना आरएसआर में संशोधन किए मनमर्जी से छुट्टियां घटा दी हैं, जो कि शिक्षकों के साथ सीधा शोषण है।

आरएसआर के नियमों का दिया हवाला

संगठन ने स्पष्ट किया है कि शिक्षा विभाग एक वेकेशन डिपार्टमेंट है। आरएसआर 1951 के नियम 91 के तहत सामान्य राजकीय कर्मचारियों को साल में 30 उपार्जित अवकाश मिलते हैं, जबकि नियम 92 के तहत शिक्षा विभाग के कर्मचारियों को केवल 15 पीएल ही देय हैं। नियमों के अनुसार यदि शिक्षकों से छुट्टियों जैसे चुनाव, जनगणना या अन्य शैक्षणिक गतिविधि के दौरान काम लिया जाता है, तो हर 3 कार्य दिवस पर 1 पीएल देय होती है। इसका नकद भुगतान होता है। नए शिविरा पंचांग में ग्रीष्मकालीन अवकाश 10 दिन घटाकर सत्र 20 जून को ही खत्म करने, शीतकालीन में 2 दिन, दीपावली (मध्यावधि) पर 1 दिन और संस्था प्रधान द्वारा घोषित 1 अवकाश में मनमर्जी से कटौती की गई है।

खजाने पर पड़ेगा करोड़ों का वित्तीय भार

शिक्षक संघ का तर्क है कि यदि सरकार ग्रीष्मकालीन अवकाश में कटौती कर शिक्षकों से काम लेती है, तो एवज में उन्हें 14 दिन के बदले 5 पीएल देनी होगी। प्रदेश में करीब 3.5 लाख 'वेकेशनडिपार्टमेंट' कर्मचारी हैं। यदि प्रति शिक्षक एक पीएल का औसत मूल्य 2000 रुपए तथा प्रिंसिपल स्तर पर एक पीएल की राशि करीब 6000 रुपए होती है, तो सरकार पर करोड़ों रुपए का वित्तीय भार पड़ेगा।

शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री से सवाल किया है कि क्या आरएसआर नियम विभाग पर लागू नहीं होते। क्या जनता के टैक्स के करोड़ों रुपए इस तरह अनावश्यक खर्च किए जाएंगे। यह फैसला न केवल वित्तीय बोझ बढ़ाएगा, बल्कि शिक्षकों का मनोबल भी तोड़ेगा।