भीलवाड़ा से लुहारीकला मार्ग पर चलने वाली रोडवेज बस पारोली होकर वापस लुहारीकला जाते समय बनास नदी के पानी के बीच फंस गई
पारोली।
भीलवाड़ा से लुहारीकला मार्ग पर चलने वाली रोडवेज बस गुरुवार को पारोली होकर वापस लुहारीकला जाते समय बनास नदी के पानी के बीच फंस गई। बनास नदी के बीचो-बीच एकाएक बस के फंस जाने से बस में सवार यात्रियों में हड़कंप मच गया ।
भीलवाड़ा आगार डिपो की रोडवेज बस पारोली ,बागुदार, आमल्दा, वाया खजुरी होते हुए लूहारीकला जा रही थी बागूदार से आगे रोडवेज बस बनास नदी के पानी में से होकर गुजर रही थी ।
चालक की लापरवाही के कारण अचानक बस के पहिए रेत में पानी के बीचों-बीच फंस गए तथा बस बंद हो गई । पानी के बहाव के बढऩे की चिंता के चलते रोडवेज में सवार 50 से 60 यात्री घबरा कर बस से बाहर निकले। आसपास के गांव से ट्रैक्टर मंगवाकर ग्रामीणों की मदद से रोडवेज को बाहर निकालने का प्रयास किया। लेकिन विफल रहे । इस पर जेसीबी मंगवा कर ग्रामीण की मदद से बस को बाहर निकाला गया। जेसीबी से बस निकालने के दौरान नदी में पानी का बहाव बढ़ता रहा।
रायपुर में ढाई व ज्ञानगढ़ में पौने दो इंच बारिश
भीलवाड़ा मानसून ने आगाज के बाद गांवों का रूख कर रखा है। जिले में गुरुवार को रायपुर और ज्ञानगढ़ में झमाझम बरसात हुई। रायपुर में ढाई व ज्ञानगढ़ में पौने दो इंच बरसात हुई। भीलवाड़ा शहर में रिमझिम से ही संतुष्ट होना पड़ा। भीलवाड़ा में दिनभर आसमान में बादल छाए रहे। इससे उमस ने पसीने छूड़ाए। दोपहर बाद मौसम पलटा और काली घटाएं आसमान में छा गई। उसके बाद शाम तक रिमझिम से लोग भीग गए। जिले में सर्वाधिक रायपुर में 66, ज्ञानगढ़ में 40 तथा हमीरगढ़ में 22 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई।
बारिश से चली एनीकट पर चादर
बीगोद कस्बे सहित में गुरुवार दोपहर बाद एक घन्टे तक बारिश हुई। दो दिन से लगातार हो रही बारिश से बनास नदी में पानी की आवक बनी हुई है। ईदगाह एनीकट पर चादर चलने लगी है वही त्रिवेणी नदी एनीकट पर भी चादर चल रही है।
आकोला सहित गांवो में गुरुवार को तेज बारिश का दौर जारी रहा । दोपहर बाद बारिश फिर शुरू हुई जो शाम तक जारी रही ।स्थानीय गांव में 1:30 बजे से लेकर शाम 6:30 बजे तक 21 मिलीमीटर बारिश रिकॉर्ड की गई।
अरवड़ कस्बे में दिनभर उमस एंव तेज गर्मी के बाद सांयकाल मौसम ने करवट बदली। सांयकाल बादलों की गड़गड़ाहट के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हुई जो अभी तक जारी है।
मांडलगढ़ में दोपहर बाद तेज वर्षा हुई जिससे किसानों के खेतों में बुवाई का कार्य बाधित हुआ एवं झरनो में, नालों में पानी की आवक बनी हुई है।