
मृतक किशन (पत्रिका फोटो)
सवाईपुर (भीलवाड़ा): वस्त्रनगरी भीलवाड़ा और इसके आसपास के ग्रामीण अंचल की सड़कें अब आमजन के लिए असुरक्षित गलियारा बनती जा रही हैं। पुलिस और प्रशासन की नाक के नीचे बजरी माफिया इस कदर बेलगाम हो चुके हैं कि उनके तेज रफ्तार डंपर और ट्रैक्टर अब केवल धूल नहीं, बल्कि बेगुनाहों का खून भी उड़ा रहे हैं।
बुधवार देर रात सवाईपुर रोड पर अगरपुरा चौराहे के पास माफिया के एक अनियंत्रित डंपर ने बाइक सवार तीन युवकों को बेरहमी से कुचल दिया। इससे एक एक युवक की मौके पर मौत हो गई, जबकि दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।
यह हादसा उस वक्त हुआ, जब पौंडरास निवासी किशन सिंह (25) पुत्र नंद सिंह अपने दो साथियों नरेंद्र सिंह और करण सिंह के साथ भीलवाड़ा के टेक्सटाइल मार्केट में काम खत्म कर घर लौट रहा था। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मांडलगढ़ की तरफ से आ रहे तीन डंपरों में होड़ मची थी।
रात साढ़े ग्यारह बजे अगरपुरा चौराहे के पास स्पीड ब्रेकर पर जैसे ही किशन की बाइक धीमी हुई, पीछे से काल बनकर आए एक डंपर ने उन्हें चपेट में ले लिया। हादसे में किशन सिंह डंपर के टायरों के नीचे आ गया, जबकि उसके साथी उछलकर दूर जा गिरे। दुर्घटना के बाद चालक डंपर लेकर भाग गया।
घटना से ग्रामीणों में आक्रोश फूट पड़ा। रात में अगरपुरा चौराहे पर जाम लगा दिया। हाइवे पर दोनों तरफ वाहनों की लंबी कतार लग गई। सदर और सुभाषनगर थाना पुलिस को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा। ग्रामीण इस बात से नाराज थे कि खनिज विभाग और पुलिस की मिलीभगत से बजरी भरे वाहन गलियों में मौत बनकर दौड़ रहे हैं।
दो घंटे मशक्कत के बाद पुलिस ने शव को एमजीएच की मोर्चरी पहुंचाया। गुरुवार सुबह मोर्चरी के बाहर राजपूत समाज और पौंडरास-अगरपुरा के ग्रामीणों ने धरना दिया। मुआवजे और डंपर मालिक पर कार्रवाई की मांग को लेकर घंटों गतिरोध बना रहा। दोपहर में प्रशासन और डंपर मालिक के साथ मुआवजे पर सहमति पर पोस्टमॉर्टम हुआ।
मृतक किशन सिंह के पिता नंद सिंह दिव्यांग हैं और किशन घर का बड़ा सहारा था। उसका छोटा भाई पंकज सिंह, जो दिल्ली कैंट में सेना में तैनात है। भाई की मौत की खबर सुनते ही भीलवाड़ा पहुंचा। यह विडंबना ही है कि जिस किशन का सपना खुद फौज में जाकर देश सेवा करने का था, आज उसका भाई वर्दी में उसकी अर्थी को कंधा देने पहुंचा था।
किशन की एक बहन भी है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना था कि घटना के वक्त डंपर बजरी से भरा था। लेकिन चालक ग्रामीणों के डर से डंपर को सदर थाने ले गया। यहां थाने में डंपर खाली था।
शहर के तिलकनगर क्षेत्र में राजकीय पॉलिटेक्निक कॉलेज के समीप गत 26 अप्रैल को बजरी से लदे एक बिना नंबरी ट्रैक्टर ने एक बाइक को चपेट में लिया था। घटना में कॉलेज के छात्र बागीद निवासी राकेश धाकड़ की मौत हो गई। जबकि उसका साथी गोविंद गंभीर घायल हो गया था।
अवैध बजरी खनन के खिलाफ रोक के बावजूद हाइवे पर बजरी से भरे डंपर और ट्रैक्टर लगातार दौड़ रहे हैं। पुलिस की नाकाबंदी कड़ी होने के दौरान यह बजरी से भरे वाहन गांवों के भीतर घुस जाते हैं। यहां इनकी गति अनियंत्रित होती है। ऐसे में आए दिन हादसे हो रहे। पुलिस, प्रशासन एवं खनिज विभाग की अनदेखी से हादसा हुआ।
-जगदीश जाट, अगरपुरा
घटना ने एक बार फिर प्रशासन और खनिज विभाग के दावों की पोल खोली। अवैध खनन पर अंकुश लगाने की बातें कही जाती हैं। सच तो यह है कि एक पखवाड़े के भीतर दूसरी बड़ी जानलेवा दुर्घटना है। पुलिस की जब्ती की खानापूर्ति और विभाग की सुस्ती का खामियाजा लोगों को जान देकर भुगतना पड़ रहा।
-भैरुलाल गाडरी, युवा
Published on:
08 May 2026 10:52 am
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