भीलवाड़ा

भीलवाड़ा : उलझ गए अपनों के धागे, गढ़ की बाजी जीतने पर जोर

-गढ़ बरकरार रखने में जुटी भाजपा, वोटों के बंटवारे की संभावना केे बीच फायदा उठाने की कोशिश में कांग्रेस -निर्दलीय की ताल से दोनों दल परेशान, जातिगत वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना

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भीलवाड़ा : उलझ गए अपनों के धागे, गढ़ की बाजी जीतने पर जोर

कानाराम मुण्डियार

मेवाड़ के मुकुट भीलवाड़ा के रण में इस बार हार-जीत के धागे उलझ गए हैं। गढ़ बरकरार रखने के लिए भाजपा पर अपनों की चुनौती भारी पड़ती दिख रही है। कांग्रेस वोटों के बंटवारे में किला फतेह करने की कोशिश में है। भाजपा से तीन बार के विधायक विट्ठलशंकर अवस्थी फिर मैदान में है तो कांग्रेस ने ओमप्रकाश नराणीवाल को टिकट दिया। भाजपा के टिकट वितरण से नाराज नेताओं की ओर से निर्दलीय उतारे अशोक कोठारी के कारण चुनाव रोचक बना हुआ हैं। तीनों प्रत्याशी प्रचार में जोर लगा रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी समेत स्टार प्रचारकों की सभाओं से भाजपा उत्साहित दिखाई दे रही है।

भीलवाड़ा विधानसभा में चुनावी माहौल के बीच वोट बैंक में सेंधमारी के साथ जातिगत वोटों के ध्रुवीकरण की संभावना दिख रही है। जनता माहौल पर नजर बनाए हुए हैं। साइलेंट वोटर प्रत्याशियों के वादों को कसौटी पर तोल रहे हैं। दस साल में पहली बार जनता एक और ओवरब्रिज बनाने एवं निजी कॉलोनियों में चम्बल का पानी पहुंचाने का मुद्दा जोर-शोर से उठा रही है। मुद्दों को लेकर जनता प्रत्याशियों से जवाब मांग रही है। 3 साल से अधूरा जोधड़ास आरओबी, पालड़ी को जोड़ने के लिए कोठारी नदी पर बने पुल में भ्रष्टाचार के छेद के बाद एक साल अटके काम तथा दो अन्य पुलाें के अधूरे काम को लेकर लोग प्रशासन व सरकार पर सवाल खड़े कर रहे हैं।

टेक्सटाइल उद्यमियों की चुप्पी-

टेक्सटाइल उद्योग के कारण भीलवाड़ा शहर का नाम देश-दुनिया तक हैं। यहां हर साल लगभ 125 करोड़ का कपड़ा निर्मित हो रहा है। शहर की धड़कन टेक्सटाइल पर टिकी है। प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष से रूप से सत्ता की भागीदारी में यहां उद्यमियों का भी योगदान रहता है। लेकिन इस बार उद्यमी उलझन में हैं, अधिकतर ने चुप्पी साध रखी है।

क्षेत्र के तीन बड़े मुद्दे-

-शहर के बीच से गुजर रही रेलवे लाइन फाटक पर एक और ओवरब्रिज बनाया जाएं।

-100 से अधिक मल्टीस्टोरी आवासीय योजनाओं व वंचित कॉलोनियों को चम्बल का पानी उपलब्ध कराया जाएं।

-टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा को टेक्सटाइल पार्क की सौगात चाहिए।

प्रत्याशियों के वादे-

-पहला कार्य भीलवाड़ा में रेलवे फाटक पर एक और ओवरब्रिज बनाने का रहेगा।

-कोटा, उदयपुर और जोधपुर की तर्ज पर भीलवाड़ा का विजन के साथ विकास होगा।

-शहर से पलायन कर रहे बड़े उद्योग-धंधों को वापस स्थापित करने के प्रयास होंगे।

-मल्टीस्टोरी आवासीय योजनाओं व वंचित क्षेत्रों को चम्बल का पानी पिलाएंगे।

कांग्रेस-भाजपा बराबर

आजादी से लेकर अब तक हुए 15 बार के विधानसभा चुनाव में भीलवाड़ा में कांग्रेस और भाजपा का कब्जा बराबर का रहा। सात बार कांग्रेस और सात बार भाजपा के विधायक चुनकर आए। एक बार जेएनपी ने जीत का परचम फहराया।

वोटर बोले-

भीलवाड़ा का विकास कई साल से अटका है। नेता केवल चुनाव के समय ही वादें कर जनता को गुमराह करते हैं। रेलवे लाइन फाटक पर ओवरब्रिज नहीं बनने से पूरा शहर परेशान है। इस चुनाव में एक और ओवरब्रिज ही बड़ा मुद्दा है।

-पवन सेन, बापू नगर, भीलवाड़ा

भीलवाड़ा शहर में चम्बल का पानी आए 6 साल से अधिक हो गए। लेकिन निजी कॉलोनियों के एक लाख से अधिक लोग मीठे पानी को तरस रहे हैं। नई सरकार से एक ही उम्मीद है कि वंचितों को चम्बल का पानी मिल जाएं।

-विजय पारख, केसरिया पारस कॉलोनी, भीलवाड़ा

पिछला चुनाव परिणाम-2018

विठलशंकर अवस्थी -93,198

ओमप्रकाश नराणीवाल -43,620

जीत का अंतर- 49,578

भीलवाड़ा विस : फैक्ट

कुल बूथ- 232

कुल मतदाता- 279783

पुरुष- 143101

महिला- 136671

थर्ड जेंडर- 11

प्रत्याशी-12

स्टारकों प्रचारकों पर टिकी आस-

त्रिकोणीय व सीधे मुकाबलों में उलझी सीटों को जीतने के लिए दोनों ही प्रमुख दल स्टार प्रचारकों व बड़े नेताओं की सभाओं से उम्मीद लगाए हैं। कांग्रेस की ओर से राष्ट्रीय महासचिव प्रियंका गांधी, मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट तो भाजपा के समर्थन में पीएम नरेन्द्र मोदी, यूपी सीएम आदित्यनाथ योगी व पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की यहां सभा हो चुकी है। राजे का भीलवाड़ा में रोड शो भी हो चुका है।

Published on:
23 Nov 2023 01:43 pm
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