भीलवाड़ा

राजस्थान में दिव्यांग कोटे के बदले नियम: सरकारी नौकरी में प्रमाण पत्रों की जांच के लिए सातों संभागों में बनेगा बोर्ड

Disabled Quota Rule Change: राजस्थान सरकार ने सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे के नियमों में बदलाव किया है। अब दिव्यांग प्रमाण पत्रों की जांच के लिए 7 संभागीय मुख्यालयों पर विशेष सत्यापन बोर्ड बनाए जाएंगे और सामान्य अस्पतालों के प्रमाण पत्र मान्य नहीं होंगे।
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CM Bhajanlal Sharma
सीएम भजनलाल शर्मा। पत्रिका फाइल फोटो

Action On Fraud Disability Certificate: सरकारी नौकरियों में दिव्यांग कोटे का लाभ लेने वाले अभ्यर्थियों और वर्तमान कर्मचारियों के लिए बड़ी खबर है। दिव्यांग प्रमाण पत्रों में आ रही विसंगतियों और फर्जीवाड़े पर लगाम कसने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब किसी भी सामान्य अस्पताल का प्रमाण पत्र सरकारी नौकरी के लिए मान्य नहीं होगा। सरकार ने प्रदेश के सभी 7 संभागीय मुख्यालयों के मेडिकल कॉलेजों में विशेष दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड बनाने का निर्णय किया है। कार्मिक विभाग की शासन सचिव अर्चना सिंह ने यह कदम राजस्थान उच्च न्यायालय की ओर से अमन बनाम राज्य व अन्य मामले में दिए गए अंतरिम आदेश की पालना में उठाया है।

अब ऐसे होगी दिव्यांगता की जांच

अब पूरी प्रक्रिया को पारदर्शी और सख्त बना दिया गया है। चिकित्सा विभाग की ओर से सातों संभाग जयपुर, जोधपुर, अजमेर, बीकानेर, कोटा, उदयपुर और भरतपुर के मेडिकल कॉलेजों और उनसे संबद्ध अस्पतालों में दिव्यांगता सत्यापन बोर्ड का गठन किया जाएगा। इस बोर्ड में असिस्टेंट प्रोफेसर या उससे उच्च स्तर के डॉक्टर शामिल होंगे। मेडिकल कॉलेजों को सभी प्रकार की दिव्यांगता मापने के लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग की ओर से तय किए गए मानक उपकरणों से सुसज्जित किया जाएगा। जांच के दौरान सभी संबंधित डॉक्टर अनिवार्य रूप से मौजूद रहेंगे।

नौकरी चाहने वाले युवाओं के लिए क्या बदला

अब भर्ती परीक्षाओं में आवेदन करते समय सभी अभ्यर्थियों के पास वैध यूडीआईडी कार्ड होना अनिवार्य होगा। राजस्थान लोक सेवा आयोग और कर्मचारी चयन बोर्ड सहित सभी भर्ती एजेंसियां अपने विज्ञापन में यह स्पष्ट लिखेंगी कि चयनित अभ्यर्थियों की दिव्यांगता की जांच केवल संभागीय मुख्यालयों पर बने नए बोर्ड द्वारा की जाएगी। यदि किसी अभ्यर्थी ने पहले से ही कोई दिव्यांगता प्रमाण पत्र बनवा रखा है, तो भी उसकी पात्रता का अंतिम निर्णय इस नए बोर्ड द्वारा मानकों के आधार पर की गई जांच के बाद ही तय होगा।

पहले से नौकरी कर रहे कर्मचारियों का क्या होगा

राज्य सरकार के जिन सेवारत दिव्यांग कर्मचारियों या अधिकारियों का पुन सत्यापन किया जा रहा है, उनके लिए भी स्थिति स्पष्ट कर दी गई है। यदि पुरानी जांच और नए सत्यापन में दिव्यांगता के प्रतिशत में अंतर पाया जाता है तो ऐसे कर्मचारियों की योग्यता का निर्धारण उनके चयन के समय लागू मेडिकल मानकों के आधार पर ही किया जाएगा।

अपील का भी मिलेगा अधिकार

सरकार ने अभ्यर्थियों और कर्मचारियों को राहत देते हुए अपीलीय सत्यापन मेडिकल बोर्ड बनाने का भी प्रावधान किया है। यह अपीलीय बोर्ड संभागीय मुख्यालय स्तर के मेडिकल कॉलेज में एडिशनल प्रिंसिपल या मेडिकल अधीक्षक की अध्यक्षता में बनेगा। इस बोर्ड के सदस्य प्रारंभिक सत्यापन बोर्ड के सदस्यों से उच्च पद के होंगे। यदि कोई नया अभ्यर्थी या सेवारत कर्मचारी प्रारंभिक मेडिकल बोर्ड की जांच या प्रतिशत से असंतुष्ट है, तो वह इस अपीलीय बोर्ड में अपील दायर कर सकेगा।

Updated on:
17 Jul 2026 09:37 am
Published on:
17 Jul 2026 09:35 am