भीलवाड़ा

राजस्थान हाईकोर्ट की खान विभाग को कड़ी फटकार: 68 करोड़ का रिकवरी नोटिस रद्द

कोर्ट ने खान सचिव को जवाबदेही तय करने के दिए निर्देश

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Apr 06, 2026
कोर्ट (फाइल फोटो)

अवैध खनन की जांच के नाम पर ड्रोन सर्वे करवाकर पट्टाधारकों को सीधे करोड़ों रुपए का रिकवरी का नोटिस थमाने वाले खान विभाग को राजस्थान हाईकोर्ट से करारा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने चित्तौड़गढ़ के एक खान मालिक को थमाए गए 68.32 करोड़ रुपए की पेनल्टी के नोटिस को रद्द कर दिया है। अदालत ने विभाग की इस कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताते हुए कहा कि बिना सर्वे रिपोर्ट दिए किसी भी व्यक्ति से जवाब मांगना प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का सीधा उल्लंघन है। न्यायाधीश संजीत पुरोहित की एकल पीठ ने यह आदेश चित्तौड़गढ़ के सावा निवासी मोहम्मद साबिर खान की ओर से दायर रिट याचिका को दिया।

क्या है पूरा मामला

याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने न्यायालय को बताया कि उन्हें साल 1986 में रेड ऑकर और चाइना क्ले का खनन पट्टा मिला था। इसकी वैधता 2037 तक है। खनन कार्य पूरी तरह नियमों के तहत हो रहा है। इसके बावजूद विभाग ने 4 अक्टूबर 2025 को एक निजी एजेंसी से ड्रोन सर्वे करवाया और उस सर्वे की रिपोर्ट याचिकाकर्ता को दिए बिना ही 4 दिसंबर 2025 को 68 करोड़ 32 लाख 89 हजार 120 रुपए का नोटिस थमा दिया। सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता ने दलील दी कि ड्रोन सर्वे सबसे वैज्ञानिक तरीका है और नोटिस में सर्वे के जरूरी आंकड़े दे दिए गए थे, इसलिए पूरी रिपोर्ट देना आवश्यक नहीं है। कोर्ट ने इस दलील को सिरे से नामंजूर कर दिया।

विभाग अपने ही सर्कुलर को दिखा रहा ठेंगा

अदालत ने हैरानी जताते हुए कहा कि खान विभाग ने खुद 6 मार्च 2025 को एक सर्कुलर जारी किया था। इसमें स्पष्ट निर्देश हैं कि खदानों के निरीक्षण से पहले पट्टाधारक को नोटिस दिया जाए, संभव हो तो उसकी मौजूदगी में जांच हो और कानूनी नोटिस जारी करते समय निरीक्षण रिपोर्ट की कॉपी अनिवार्य रूप से दी जाए। लेकिन विभाग के अधिकारी अपने ही आदेशों की अवहेलना कर रहे हैं। कोर्ट ने पूर्व के मेघराज सिंह शेखावत और बाबू भाई पटेल जैसे कई मामलों का हवाला देते हुए कहा कि बार-बार अदालत के आदेशों के बावजूद विभाग का यह मनमाना रवैया अदालतों पर मुकदमों का अनावश्यक बोझ बढ़ा रहा है।

खान सचिव को दिए कड़े निर्देश

अधिकारियों के इस अड़ियल रवैये पर ऐतराज जताते हुए हाईकोर्ट ने खान एवं भूविज्ञान विभाग के प्रमुख सचिव को निर्देश दिए हैं कि वे इस मामले का संज्ञान लें। कोर्ट ने आदेश दिए हैं कि निरीक्षण और सर्वे की प्रक्रिया को लेकर सभी अधिकारियों के लिए एक गाइडलाइन जारी की जाए। भविष्य में किसी भी कार्रवाई से पहले प्राकृतिक न्याय, पारदर्शिता और निष्पक्षता का अनिवार्य रूप से पालन हो। इन निर्देशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए मॉनिटरिंग सिस्टम बनाया जाए। हालांकि, अदालत ने राज्य सरकार को यह छूट दी है कि वह याचिकाकर्ता को ड्रोन सर्वे की पूरी रिपोर्ट उपलब्ध करवाने के बाद, नियमों के दायरे में रहते हुए नए सिरे से नोटिस जारी कर सकती है।

Published on:
06 Apr 2026 08:26 am
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