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सिर्फ स्कूल भेज देना काफी नहीं… बच्चे का भविष्य संवारना है, तो अभिभावकों को भी बदलना पड़ेगा

बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए सिर्फ स्कूल भेज देना काफी नहीं है

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Simply sending a child to school is not enough... If you want to shape a child's future, parents, too, must change.

सिर्फ स्कूल भेज देना काफी नहीं... बच्चे का भविष्य संवारना है, तो अभिभावकों को भी बदलना पड़ेगा

भीलवाड़ा. आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में ज्यादातर माता-पिता यह मान बैठते हैं कि बच्चे का अच्छे स्कूल में दाखिला करवा देने और फीस भर देने मात्र से उनकी जिम्मेदारी पूरी हो गई है। लेकिन शिक्षाविदों और बाल मनोवैज्ञानिकों का साफ कहना है कि बच्चे के संपूर्ण विकास के लिए सिर्फ स्कूल भेज देना काफी नहीं है। अगर बच्चे को एक जिम्मेदार और सफल इंसान बनाना है, तो अभिभावकों को भी अपनी आदतों में बदलाव लाना होगा और पैसिव (निष्क्रिय) के बजाय सक्रिय अभिभावक की भूमिका निभानी होगी।

सुवाणासीबीईओ रामेश्वर जीनगर का कहना है कि शिक्षा केवल स्कूल की चारदीवारी तक सीमित नहीं है। घर का माहौल और माता-पिता की सक्रिय भागीदारी बच्चे के मानसिक और शैक्षणिक विकास की असली नींव तय करती है।

  • 1. रोज करें संवाद, पूछें 'आज क्या सीखा: बच्चों से उनके दिनभर के रूटीन पर चर्चा करें। स्कूल से लौटने पर उनसे सिर्फ मार्क्स के बारे में न पूछें, बल्कि यह जानने की कोशिश करें कि आज उन्होंने स्कूल में नया क्या सीखा। इससे बच्चे का आत्मविश्वास बढ़ता है।
  • 2. होमवर्क और पढ़ाई पर रखें सीधी नजर: बच्चों को सिर्फ पढ़ने के लिए कहकर न छोड़ दें। उनके होमवर्क और सेल्फ-स्टडी पर नजर रखें। देखें कि वे अपनी पढ़ाई को लेकर कितने गंभीर हैं और कहाँ उन्हें मदद की जरूरत है।
  • 3. शिक्षकों से बनाए रखें जीवंत संपर्क: केवल शिकायत मिलने पर या रिपोर्ट कार्ड लेने के लिए ही स्कूल न जाएं। शिक्षक-अभिभावक बैठक (पीटीएम) में नियमित रूप से शामिल हों या फोन कॉल के जरिए शिक्षकों से जुड़े रहें ताकि बच्चे की प्रगति का सही आकलन हो सके।
  • 4. मोबाइल, दोस्तों और आदतों पर रखें निगरानी: डिजिटल युग में बच्चों की मोबाइल स्क्रीन टाइमिंग, उनकी आदतों और उनके फ्रेंड सर्कल पर नजर रखना बेहद जरूरी है। पता करें कि वे इंटरनेट पर क्या देख रहे हैं और उनके दोस्त कौन हैं।
  • 5. सिर्फ डांटें नहीं, समझाएं और साथ दें: गलतियों पर सिर्फ डांटना या मारना समाधान नहीं है। बच्चों की समस्याओं को समझें, उनके साथ खड़े रहें और उन्हें सही-गलत का फर्क प्यार से समझाएं।
  • 6. पढ़ाई को बोझ नहीं, जिम्मेदारी बनाएं: बच्चों के मन में पढ़ाई का खौफ पैदा न करें। उन्हें इस तरह प्रेरित करें कि वे पढ़ाई को एक दबाव या बोझ मानने के बजाय अपनी जिम्मेदारी समझें।

शिक्षक रास्ता दिखाता है, चलना आपको ही सिखाना होगा

अभिभावकों को यह समझना होगा कि स्कूल और शिक्षक बच्चे को केवल सही रास्ता दिखा सकते हैं और उसका मार्गदर्शन कर सकते हैं। लेकिन, उस रास्ते पर बच्चे का उंगली पकड़कर चलना सिखाना और उसे भटकने से रोकना पूरी तरह से अभिभावक का ही काम है। बच्चे का भविष्य घर और स्कूल दोनों की साझा मेहनत से ही संवर सकता है।