भीलवाड़ा में ‘इन्वेस्ट एमपी’: 20 साल पुराने जल विवाद पर बोले एमपी के सीएम यादव- पानी भगवान का प्रसाद, अब राज्यों के लड़ने का दौर खत्म एमपी में निवेश का खुला न्योता: बड़े प्रस्तावों के लिए कैबिनेट सब-कमेटी राजस्थान के उद्यमियों की बुद्धिमत्ता और व्यापारिक कौशल ने ही आजादी के बाद देश के विकास में […]
राजस्थान के उद्यमियों की बुद्धिमत्ता और व्यापारिक कौशल ने ही आजादी के बाद देश के विकास में सबसे बड़ा योगदान दिया है। राजस्थानी उद्यमियों की बुद्धि इतनी तीव्र है कि यहां का व्यापारी केवल देश में ही नहीं, बल्कि चांद पर जाकर भी व्यापार करने की क्षमता रखता है। मारवाड़ी के जुझारूपन का ही परिणाम है कि आज राजस्थान में रेत से भी तेल निकल रहा है।
यह बात मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को भीलवाड़ा में कही। वे मध्यप्रदेश औद्योगिक विकास निगम और मेवाड़ चैम्बर ऑफ कॉमर्स के संयुक्त तत्वावधान में एक होटल में आयोजित 'इन्वेस्ट एमपी' कार्यक्रम को सम्बोधित कर रहे थे। उन्होंने भीलवाड़ा के उद्यमियों को मध्यप्रदेश में निवेश का निमंत्रण दिया। साथ ही कहा कि व्यापार में आने वाली बाधाओं को दूर करने के लिए प्रतिबद्ध है। यादव ने दोनों राज्यों के बीच नदियों के पानी के बंटवारे को लेकर चल रहे 20 साल पुराने विवादों के खात्मे का जिक्र किया। डॉ. यादव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था का हवाला देते हुए कहा कि आज अमेरिका, ब्रिटेन और यूरोप जैसे बड़े देश आर्थिक चुनौतियों से जूझ रहे हैं, वहीं प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत का व्यापारिक दरवाजा पूरी दुनिया के लिए खुला है।
कार्यक्रम में मेवाड़ चैम्बर के महासचिव आरके जैन ने मध्यप्रदेश की टेक्सटाइल पॉलिसी की सराहना की। उन्होंने भीलवाड़ा सांसद दामोदर अग्रवाल से मांग रखी कि राजस्थान में भी एमपी की तर्ज पर नीतियां बनाई जाएं। आरटीएमए चेयरमैन डॉ. एसएन मोदानी ने उद्योगों का ब्यौरा पेश किया। एमपी औद्योगिक विकास कॉरपोरेशन के एमडी चंद्रमौली शुक्ला ने एमपी की औद्योगिक नीतियों की जानकारी दी।
कार्यक्रम की शुरुआत में मेवाड़ चैम्बर के अध्यक्ष अनिल मिश्रा और महासचिव आरके जैन ने सीएम का स्वागत किया। इस मौके पर सहकारिता मंत्री गौतम दक, सांसद दामोदर अग्रवाल, राज्यसभा सांसद बालयोगी उमेशनाथ महाराज, उद्योगपति रामपाल सोनी, दिनेश नौलखा, तिलोक छाबड़ा और पंकज ओस्तवाल, शंभू काबरा, सहित कई प्रमुख उद्योगपति मौजूद रहे।
'इन्वेस्ट एमपी' जैसे गरिमामय कार्यक्रम में व्यवस्थाओं और समय-पालन की पोल भी खुल गई। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव कार्यक्रम में पूरे तीन घंटे की देरी से पहुंचे। उन्होंने देरी से आने और जल्द वापस लौटने के लिए मंच से क्षमा भी मांगी।