अब भी 38 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की अपार जनरेशन प्रक्रिया शेष, नए संशोधित प्रपत्र को सभी स्कूलों तक पहुंचाया जाएगा
वन नेशन-वन स्टूडेंट विजन के तहत राजस्थान के सभी सरकारी और गैर-सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों की अपार आईडी बनाने की प्रक्रिया में बड़ा बदलाव किया गया है। अब बिना माता-पिता या वैधानिक अभिभावक की लिखित सहमति के यह आईडी नहीं बनेगी। इतना ही नहीं, यदि अभिभावक यह आईडी नहीं बनवाना चाहते हैं, तो स्कूलों को उनकी असहमति भी लिखित में लेनी होगी। राजस्थान स्कूल शिक्षा परिषद की राज्य परियोजना निदेशक एवं आयुक्त डॉ. रश्मि शर्मा ने बुधवार को इस संबंध में प्रदेश के सभी मुख्य जिला शिक्षा अधिकारियों को सख्त निर्देश जारी किए हैं।
शिक्षा विभाग की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि उच्च न्यायालय ओडिशा के हालिया निर्णय के बाद सहमति पत्र में संशोधन किया गया है। अब तक स्कूलों की ओर से केवल सहमति ली जा रही थी, लेकिन नए आदेश के तहत स्कूलों को एक संशोधित सहमति या असहमति प्रपत्र भेजा गया है। यह प्रपत्र अंग्रेजी और हिंदी दोनों भाषाओं में उपलब्ध कराया गया है। इसे भरकर देना अनिवार्य होगा।
शिक्षा परिषद के आंकड़ों के अनुसार शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए राज्य में अब तक केवल 61.32 प्रतिशत विद्यार्थियों की ही अपार आईडी जनरेट हो पाई है। विभाग ने इसे जल्द से जल्द 100 प्रतिशत तक पहुंचाने का लक्ष्य रखा है। आदेश में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 100 प्रतिशत लक्ष्य प्राप्ति का मतलब केवल आईडी बनाना नहीं है, बल्कि प्रक्रिया को पूरा करना है। यदि कोई अभिभावक अपने बच्चे की अपार आईडी बनवाने से साफ मना कर देता है, तो स्कूल प्रशासन को उनसे प्रपत्र पर असहमति दर्ज करवानी होगी, ताकि अपार जनरेशन कार्य की प्रगति शत-प्रतिशत दिखाई जा सके। यह आईडी यूडाइस पोर्टल पर स्कूल लॉगिन के माध्यम से ही बनाई जाएगी। इसके लिए विद्यार्थी के यूडाइस डेटा का आधार डेटा के साथ समान होना और अभिभावक की लिखित सहमति अनिवार्य है।
यह शिक्षा मंत्रालय की एक पहल है, जो प्रत्येक छात्र को एक आजीवन और विशिष्ट पहचान संख्या प्रदान करती है। इससे छात्र की शैक्षणिक प्रगति, डिग्री, छात्रवृत्ति और अन्य उपलब्धियों का सारा रेकॉर्ड एक ही डिजिटल जगह पर सुरक्षित रहता है। भविष्य में स्कूल बदलने या उच्च शिक्षा में प्रवेश के दौरान इसी आईडी के जरिए छात्र का पूरा विवरण आसानी से प्राप्त किया जा सकेगा।
विभाग ने सभी जिला परियोजना समन्वयकों को निर्देश दिया है कि वे तत्काल प्रभाव से इस नए संशोधित प्रपत्र को सभी स्कूलों तक पहुंचाएं और शेष बचे 38 प्रतिशत से अधिक विद्यार्थियों की अपार जनरेशन प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा करवाएं।