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खनिज विभाग की सुस्ती से खजाने को लगी 7.74 करोड़ की चपत

रॉयल्टी ठेका: आठ माह की देरी ने बिगाड़ा बजट, 17.76 करोड़ का ठेका अंत 10.02 करोड़ में छुटा, लगातार घटानी पड़ी बेस प्राइस

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The sluggishness of the Mineral Department caused a loss of Rs 7.74 crore to the treasury.

खनिज विभाग की सुस्ती से खजाने को लगी 7.74 करोड़ की चपत

भीलवाड़ा जिले में खनिज विभाग की लचर कार्यप्रणाली और रॉयल्टी ठेके में हुई देरी के कारण सरकारी खजाने को 7.74 करोड़ रुपए से अधिक का भारी नुकसान उठाना पड़ा है। भीलवाड़ा, सहाड़ा और हमीरगढ़ की सीमा से निकलने वाले चुनाई पत्थर की रॉयल्टी वसूली का ठेका पूरे आठ माह तक बंद रहने के बाद अब जाकर दोबारा शुरू हो पाया है। विभाग को यह नया ठेका जयपुर की एक कंपनी को 10.02 करोड़ रुपए में देना पड़ा है, जबकि यही ठेका पहले काफी अधिक राशि में दिया गया था। ठेका फाइनल होने के बाद अब खनिज विभाग ने वसूली नाकों से अपने कर्मचारियों को हटा लिया है।

यूं हुआ करोड़ों के राजस्व का नुकसान

पूर्व में यह ठेका 1 अप्रेल 2025 को भीलवाड़ा के ठेकेदार सुवालाल जाट को 13.70 करोड़ रुपए में दिया था। इसके कुछ माह बाद 23 जुलाई 2025 को सरकार की ओर से रॉयल्टी की दरें बढ़ा दी गईं। इससे इस ठेके की कुल राशि बढ़कर 17.76 करोड़ रुपए हो गई। ठेकेदार ने बढ़ी हुई दर से यह अतिरिक्त राशि जमा कराने के लिए कुछ माह का समय मांगा था, विभाग की ओर से समय नहीं देने पर बढ़ी हुई राशि जमा कराने से साफ इनकार कर दिया। इसके चलते खनिज विभाग ने 19 अगस्त 2025 को यह ठेका खंडित (निरस्त) कर दिया था। ठेका निरस्त होने के बाद से पिछले आठ माह तक रॉयल्टी वसूली का जिम्मा खनिज विभाग के कर्मचारियों के पास था। लेकिन विभागीय तंत्र वसूली में पूरी तरह विफल साबित हुआ। इस पूरी अवधि में विभाग के कर्मचारी करीब 2 करोड़ रुपए की रॉयल्टी भी वसूल नहीं कर पाए। सीधा असर यह हुआ कि सरकार को करीब 7.74 करोड़ रुपए के राजस्व की भारी चपत लगी।

कोई नहीं आया आगे, तो यूं गिरानी पड़ी नीलामी राशि

पुराना ठेका निरस्त होने के बाद खनिज विभाग ने नई नीलामी प्रक्रिया शुरू की, लेकिन 17.76 करोड़ की राशि पर कोई भी ठेकेदार नीलामी में हिस्सा लेने नहीं आया। इसके बाद विभाग लगातार बेस प्राइस घटाता चला गया, लेकिन फिर भी ठेकेदार दूरी बनाई। विभाग ने फिर रॉयल्टी वसूली के लिए बेस प्राइस घटाकर 9 करोड़ 32 लाख निर्धारित किया। न्यूनतम मूल्य पर बोली लगने के बाद जयपुर की कंपनी के पक्ष में यह ठेका 10 करोड़ 2 लाख 70 हजार में छोड़ा गया। अधिकारियों का कहना है कि हर बार 20 से 10 प्रतिशत की राशि कम करने के बाद भी इस राशि में कोई ठेका लेने को तैयार नहीं था। इस बार भी विभाग को उम्मीद नहीं थी कोई 9 करोड़ 32 लाख 39 हजार रुपए की नीलामी दर में कोई बोली लगाने आएगा।

  • नीलामी दर का यह रहा सफर
  • 17.76 करोड़ – कोई नहीं आया
  • 14.21 करोड़ – कोई नहीं आया
  • 12.79 करोड़ – कोई नहीं आया
  • 11.51 करोड़ – कोई नहीं आया
  • 10.35 करोड़ – कोई नहीं आया
  • 10.02 करोड़ में छुटा ठेका