भीलवाड़ा

वो इंतजार करती रही, 28 दिन में 2 किलोमीटर नहीं चल पाए कलक्टर

कलक्टर साहब, कोठारी नदी को आपका इंतजार है...!-अफसरों की अनदेखी से कोठारी नदी के किनारों पर लगातार बढ़ रहे अतिक्रमण बड़ा सवाल : आखिर नदी के किनारों को पाटने एवं कब्जे करने का खेल खुलेआम चल रहा है, लेकिन अफसरों को इसकी भनक क्यों नहीं है? कहीं ऐसा तो नहीं कि सब कुछ मिलीभगत से ही चल रहा है।

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वो इंतजार करती रही, 28 दिन में 2 किलोमीटर नहीं चल पाए कलक्टर

के. आर. मुण्डियार

भीलवाड़ा.

प्रदेश के बीसलपुर बांध को भरने वाली बनास नदी की सहायक कोठारी नदी को इन दिनों भीलवाड़ा जिले के कलक्टर का इंतजार है। यह नदी भीलवाड़ा शहर से सटकर गुजर रही है। प्रशासन की अनदेखी के कारण कोठारी नदी के किनारों पर अतिक्रमण लगातार बढ़ रहे हैं। पक्के व कच्चे निर्माण किए जा रहे हैं। पिछले कुछ समय से मलबा डालकर किनारों को दबाने की गतिविधियां बढ़ गई हैं, लेकिन एनजीटी के निर्देश के बावजूद कलक्टर आशीष मोदी 28 दिन में दो किलोमीटर दूर कोठारी नदी नहीं पहुंच पाए हैं।

भीलवाड़ा शहर से गुजर रही नदी के करीब 4 किलोमीटर के क्षेत्र में छोटे-बड़े 80 से ज्यादा पक्के निर्माण हो चुके हैं। हाल ही चबूतरे-फर्श, पार्किंग स्थल इत्यादि बनाकर 20 से ज्यादा नए निर्माण किए गए हैं। रिंग रोड व नदी के बीच जगह कब्जाने के प्रयास लगातार किए जा रहे हैं। नगर परिषद का कचरा व मलबा भी नदी के पेटे में डाला जा रहा है।

ये अफसर जिम्मेदार

रिंग रोड व नदी के बीच कब्जाई जा रही जमीन करोड़ों की हैं। अतिक्रमण बनते ही नहीं तोड़े जाएंगे तो बाद में तोडऩा या हटाना बेहद मुश्किल होगा। हालात देखकर ऐसा प्रतीत हो रहा है कि यूआईटी के अफसर जानबूझ कर अनभिज्ञ बने हुए हैं।

यह दिए थे एनजीटी ने निर्देश-

पर्यावरणविद् बाबूलाल जाजू ने कोठारी नदी के हालात से अवगत कराते हुए उसके मूल स्वरूप को लौटाने के लिए राष्ट्रीय हरित अभिकरण (एनजीटी-भोपाल जोनल बेंच) में जनहित याचिका दर्ज कराई थी। इस प्रकरण के निर्देश की पालना में जिला कलक्टर को जाजू के साथ 20 जून को कोठारी नदी का मौका निरीक्षण करना था। लेकिन अभी तक कलक्टर ने नदी के बिगड़ रहे हालात का जायजा नहीं लिया है।

सीमांकन होना चाहिए-

-कोठारी नदी के प्राकृतिक स्वरूप से छेड़छाड़ नहीं होनी चाहिए। नदी में जो अवैध गतिविधियां की जा रही है, उसको रोका जाएं।

-उच्चस्तरीय टीम से नदी का सीमांकन करवाकर यह पता लगाया जाना चाहिए कि नदी का भूभाग कहां तक हैं। ताकि इससे साफ हो पाएगा कि नदी के कितने भाग पर अतिक्रमण है।

सुझाव दिए, अमल शेष है-

पर्यावरणविद् जाजू ने गत दिनों जिला कलक्टर को पत्र लिखकर कोठारी नदी के दोनों किनारों पर 100-100 फीट में 2 लाख पौधे लगाकर ग्रीन-पट्टिका बनाने का सुझाव दिया था। जाजू ने बताया कि कलक्टर ने यूआईटी सचिव को योजना का प्रारूप तैयार करने के निर्देश भी दिए थे, लेकिन बात अभी आगे नहीं बढ़ी। ऐसे ही हालात रहे तो कोठारी नदी नाले में बदल जाएगी, जिसके लिए आने वाली पीढिय़ां हमें कभी माफ नहीं करेगी।

सवाल :

भीलवाड़ा से गुजर रही कोठारी नदी की दुर्दशा के लिए कौन जिम्मेदार हैं। कोठारी नदी को कैसे बचाया जा सकता है। शहरवासी अपनी राय यहां दें।

इनका कहना है-

कोठारी नदी को लेकर हम तीन बैठक कर चुके हैं। नदी में जो भी अवैध गतिवधियां हो रही है, चैक करवाकर उस पर कार्रवाई की जाएगी।

-आशीष मोदी, कलक्टर, भीलवाड़ा

Updated on:
18 Jul 2022 01:42 pm
Published on:
18 Jul 2022 01:41 pm
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