उत्पादन 32 हजार टन, रवन्ना काटा 1.10 लाख टन का, लीजधारकों को नोटिस
प्रदेश की नदियों और प्रमुख नालों का सीना चीरकर माफिया रोजाना लाखों का बहुमूल्य खनिज गारनेट (रेत का सोना) लूट रहे हैं। इस अवैध लूट को सफेदपोश नेताओं, पुलिस और खनिज विभाग के संरक्षण में कागजों में ई-रवन्ना काटकर पूरी तरह वैध बनाया जा रहा है। हालात यह हैं कि खदानों में उत्पादन न के बराबर है, लेकिन कागजों में अंधाधुंध रवन्ना जारी कर नदियों से लूटे गए अवैध गारनेट को एक नंबर में खपाया जा रहा है। प्रदेश में गारनेट की 18 खदानें हैं, लेकिन 11 लीज संचालित हैं। इनमें भीलवाड़ा की तीन खदान मालिक जमकर चांदी कूटने का काम कर रहे हैं।
भीलवाड़ा की तीन लीजों के आंकड़े इस महाघोटाले की पोल खोलने के लिए काफी हैं। इन खदानों से उत्पादन नाममात्र का हुआ, लेकिन कागजों में गारनेट कई गुना ज्यादा बेच दिया। तीनों लीजधारकों ने डीलरों के माध्यम से अवैध गारनेट को एक नंबर में बदलने के फेर में 78153 टन से ज्यादा का अतिरिक्त रवन्ना जारी कर दिया। भीलवाड़ा, टोंक, सावर, आमेट और राजसमंद की नदियों से लूटा गया यह माल इन्हीं फर्जी रवन्ना के जरिए बाजार में पहुंचा है। भारतीय खान ब्यूरो अजमेर के अनुसार राजस्थान में निकलने वाले गारनेट की कीमत 4,320 रुपए प्रति टन है। यदि औसत दर 4,000 रुपए प्रति टन मानी जाए, तो इन लीजधारकों ने 31.26 करोड़ का 78,153 टन अवैध गारनेट (रवन्ना) बाजार में बेच दिया है।
भीलवाड़ा में गारनेट की स्थिति
प्रदेश में 200 डीलर हैं जो गारनेट का काम करते हैं। भीलवाड़ा, अजमेर, केकड़ी और उदयपुर की अधिकृत खदानों में हकीकत में माल का उत्पादन ठप सा है, लेकिन अंधाधुंध रवन्ना निकल रहे हैं। अकेले भीलवाड़ा और बिजौलिया में गारनेट के 91 डीलर हैं। इनमें 40 डीलर इस काले खेल के मास्टरमाइंड हैं। अवैध खनन को वैध साबित करने के लिए ये माफिया अन्य राज्यों के फर्जी रवन्ना का इस्तेमाल कर रहे हैं।
खनिज विभाग ने तीन लीजधारकों को अपनी क्षमता से अधिक गारनेट के रवन्ना जारी करने पर नोटिस थमाया हैं। विभाग ने 15 दिन में जवाब मांगा है। जवाब न मिलने पर 4 हजार रुपए प्रति टन के आधार पर 31.26 करोड़ रुपए का जुर्माना वसूला जाएगा।
गारनेट की तीन लीजधारकों को उत्पादन से अधिक गारनेट का रवन्ना जारी करने पर नोटिस जारी किए है। जवाब आने पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
पीके अग्रवाल, कार्यवाहक खनिज अभियंता भीलवाड़ा