न वैज्ञानिक आधार, न विजन क्लियर... मनमर्जी की ऊंचाई से हर दिन दांव पर लग रही शहरवासियों की जान, प्रशासन मौन
किसी भी शहर का यातायात प्रबंधन वहां के चौराहों और सर्कल की वैज्ञानिक बनावट पर निर्भर करता है, लेकिन टेक्सटाइल सिटी भीलवाड़ा में यातायात के नियम सिर्फ नगर विकास न्यास और नगर निगम की फाइलों में दबकर रह गए हैं। शहर के प्रमुख चौराहों पर बने सर्कल सुगम यातायात का माध्यम बनने के बजाय मनमर्जी के स्मारक और हादसों का मुख्य कारण बन चुके हैं।
यातायात इंजीनियरिंग के स्पष्ट नियमों के बावजूद, शहर में सर्कल की लंबाई-चौड़ाई और ऊंचाई का निर्धारण सड़क के अनुपात में न होकर ठेकेदारों और अधिकारियों की मनमर्जी से किया गया है। नतीजा यह है कि भारी-भरकम और ऊंचे चौराहों के कारण चालकों की दृष्टि रेखा पूरी तरह बाधित हो रही है। इससे हर दिन छोटे-बड़े हादसे हो रहे हैं।
यातायात नियमों के अनुसार किसी भी सर्कल की ऊंचाई इतनी ही होनी चाहिए कि कार या दुपहिया वाहन पर बैठे चालक को चौराहे के दूसरी तरफ से आ रहा ट्रैफिक साफ नजर आए। लेकिन भीलवाड़ा में नियमों को ताक पर रखकर सर्कल को अनावश्यक रूप से ऊंचा और चौड़ा कर दिया गया है। ऐसा लगता है कि प्रशासन का ध्यान सुगम यातायात से ज्यादा सिर्फ दिखावे और अवैज्ञानिक सौन्दर्यीकरण पर है।
पत्रिका टीम ने जब शहर के प्रमुख सर्कल का जायजा लिया तो स्थिति बेहद चिंताजनक मिली। ऋंग ऋषि सर्कल (मंगल पांडे के पास) बड़ला चौराहे से आगे हरणी महादेव की ओर जाने वाले मार्ग पर स्थित इस सर्कल की ऊंचाई और चौड़ाई इतनी बढ़ा दी गई है कि सामने से आने वाले वाहनों का अंदेशा ही नहीं रहता। सबसे बड़ी विडंबना यह है कि यहां वाहन चालक सर्कल के चक्कर काटकर निकलने के बजाय सीधे हरणी महादेव मार्ग की ओर शार्टकट मारते हैं। ब्लाइंड स्पॉट बनने और नियमों की अनदेखी के कारण यहां वाहनों की भिड़ंत आम बात हो गई है।
कुंभा सर्कल व अन्य सर्कल यहां भी सड़क की चौड़ाई के मुकाबले सर्कल का व्यास इतना बड़ा और ऊंचा है कि पीक आवर्स में यहां भ्रम की स्थिति पैदा हो जाती है। दूसरी तरफ से तेज गति से आ रहे वाहन अचानक सामने आ जाते हैं।
शहर में सड़कों के आधार पर सर्कल का निर्माण तो हुआ है, लेकिन कुछ सर्कल की ऊंचाई बिना किसी तकनीकी जरूरत के काफी बढ़ा दी गई है। चौराहे की बनावट ऐसी होनी चाहिए कि किस रोड से कौनसा वाहन आ रहा है, यह सभी चालकों को स्पष्ट नजर आए। भीलवाड़ा में इस तकनीकी पहलू की अनदेखी हुई है। इससे चालकों को भारी परेशानी होती है और हादसों का खतरा बना रहता है।
- एसएस. गंभीर, पूर्व अधिशासी अभियंता, नगर विकास न्यास