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स्कूलों में प्रवेशोत्सव या मैदान में खेल, कहां जाएं गुरुजी

पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता में 76 शारीरिक शिक्षकों की ड्यूटी से भड़के शिक्षक संगठन, कलक्टर से हस्तक्षेप की मांग

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Whether it is the 'Praveshotsav' (Admission Festival) in schools or sports activities on the field—where should the teachers go?

स्कूलों में प्रवेशोत्सव या मैदान में खेल, कहां जाएं गुरुजी

भीलवाड़ा जिले के सरकारी स्कूलों में एक तरफ जहां भविष्य की नींव रखने के लिए 'प्रवेशोत्सव' का शंखनाद हो चुका है, वहीं दूसरी ओर शिक्षा विभाग ने शारीरिक शिक्षकों को स्कूलों से हटाकर खेल के मैदानों में तैनात कर दिया है। जिला शिक्षा अधिकारी (माध्यमिक) की ओर से जारी एक आदेश ने नए शिक्षा सत्र की शुरुआत में ही विवाद खड़ा कर दिया है। रेंज स्तरीय पुलिस खेलकूद प्रतियोगिता के लिए जिले के 76 शारीरिक शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है, जिसका शिक्षक संगठनों ने कड़ा विरोध शुरू कर दिया है।

सर्वे करें या प्रतियोगिता कराएं

शिक्षकों का तर्क है कि वर्तमान में पूरे जिले के स्कूलों में प्रवेशोत्सव शुरू होने वाला है। इस दौरान प्रत्येक कार्मिक को घर-घर जाकर सर्वे करना है ताकि नामांकन बढ़ाया जा सके। शिक्षकों ने सवाल उठाया है कि यदि वे पुलिस की खेलकूद प्रतियोगिताओं में व्यस्त रहेंगे, तो गांवों और ढाणियों में जाकर बच्चों का नामांकन कौन करेगा। उधर जिला शिक्षा अधिकारी (मुख्यालय) माध्यमिक राजेन्द्र कुमार गग्गड़ का कहना है कि पुलिस की खेलकूद प्रतियोगिता के लिए जिले के हर स्कूल से एक-एक शारीरिक शिक्षकों की ड्यूटी लगाई है। इससे जिले के स्कूलों में प्रवेशोत्सव कार्यक्रम पर असर नहीं पड़ेगा।

आदेश में लगाई अलग-अलग ड्यूटी

शिक्षा विभाग की ओर से जारी सूची में 22 शारीरिक शिक्षकों को पहले चरण में 24 मार्च से 30 मार्च तक लगाया गया है। दूसरे चरण में 26 से 30 मार्च तक के लिए ड्यूटी लगाई है। इन सभी 76 शारीरिक शिक्षकों को जिला खेलकूद प्रशिक्षण केन्द्र भीलवाड़ा में रिपोर्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। जबकि प्रतियोगिता की अवधि 27 से 30 मार्च 2026 तक। शिक्षकों की रवानगी के लिए अधिकांश शिक्षकों को 24 और 26 मार्च से ही कार्यमुक्त करने के आदेश दिए गए हैं। इससे जिले के 76 स्कूलों में खेल गतिविधियों और प्रवेशोत्सव सर्वे पर सीधा असर पड़ेगा।

कलक्टर को करना चाहिए हस्तक्षेप

प्रवेशोत्सव के दौरान बच्चों का नामांकन नहीं बढ़ा तो केवल शिक्षकों को दोषी ठहराया जाएगा। एक तरफ सरकार नामांकन बढ़ाने का दबाव बना रही है, दूसरी तरफ शिक्षकों को गैर-शैक्षणिक कार्यों में झोंका जा रहा है। जिला कलक्टर को तुरंत इस मामले में हस्तक्षेप कर इन ड्यूटियों को निरस्त करना चाहिए।

नीरज शर्मा, जिलाध्यक्ष, अखिल राजस्थान राज्य कर्मचारी संयुक्त महासंघ