विदाई की बेला पर हर-एक की आंख नम हो उठी। मेजबान ग्रामीण नत-मस्तक हुए तो साधु संतों के हाथ आशीर्वाद के लिए उठ गए। संतगण भी आप में गले मिले तो वह भी भावुक हो उठे। यह अद्भूत एवं आत्मियक अवसर था भीलवाड़ा जिले में अमर ज्ञान निरंजनी आश्रम एवं संकटमोचन आदर्श गोशाला समिति के तत्वावधान में शक्करगढ़ के नवनिर्मित संकट हरण हनुमत धाम में आयोजित छह दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा महोत्सव के गुरुवार को समापन का। संत जगदीशपुरी के सानिध्य में हुए अनूठे आयोजन से देश के विभिन्न हिस्सों से आए साधु संत गदगद हो कर लौटे।
छह दिवसीय कार्यक्रम में मंदिर परिसर में विभिन्न धार्मिक अनुष्ठान कार्यक्रम आयोजित हुए। जिसमें हज़ारों की संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए, पूरा कस्बा भक्ति मय ही रहा। गुजरात के संत विद्यानंद सरस्वती एवं स्वामी संत जगदीश पुरी महाराज के सानिध्य में मंदिर परिसर में बने जल मंदिर,पुजारी निवास, जलकुंड साधना-समाधि, यज्ञशाला,भव्य उद्यान,वेद विद्यालय,सत्संग भवन,अतिथि शाला, भोजनशाला, नव निर्मित सीसी रोड एवं मुख्य प्रवेश द्वार आदि का लोकार्पण हुआ।
बुधवार देर रात भजन संध्या हुई। जिसमें निवाई के संत प्रकाशदास ने प्रसिद्ध भजन बिणजारी ए हंस हंस बोल बाता थारी रह जासी के साथ देश भक्ति भजन गाए। श्रद्धालु भी भावविभोर होकर नाच उठे। पांडाल में भगवान के जयकारे गूंज उठे। कस्बे के रेगर समाज ने जुलूस निकालकर हनुमत धाम में ध्वज चढ़ाया।
गुरुवार सुबह 23 वां गोशाला वार्षिक उत्सव मनाया गया। संतों के प्रवचन हुए। हरी सेवा धाम के स्वामी हंसराम महाराज ने कहा कि गो माता के संरक्षण के संसद में बिल लाना जरूरी है। स्वामी संत विद्यानंद सरस्वती ने्र शक्करगढ़ की गोशाला की सराहना की। उन्होंने कहा कि संत ही सनातन धर्म को जिंदा रखते है, इसीलिए संतों का सम्मान करना चाहिए। साथ ही हर घर में एक गो माता को जरूर पालना चाहिए।
कार्यक्रम में आश्रम के ट्रस्टी डीसी चौधरी, सुरेश चंद्र रुइया,संजय निमोदिया,हेम सुरतानिया,किशोर शर्मा, नाथूलाल पंचोली,दिनेश विशाल मंडोवरा,मुकेश बांगड़,पंकज नागौरी,सुशील लढ़ा,सुरेंद्र जोशी,रामपाल शर्मा,सरपंच मनभर देवी,सरपंच वेद प्रकाश, दीपक टाक व आश्रम के ब्रह्माचारी महेंद्र चैतन्य,हंसराज चैतन्य आदि मौजूद रहे।