कोरोना संक्रमितों की संख्या में 25 से 45 साल तक लोग ज्यादा आ रहे है
भीलवाड़ा।
कोरोना की दूसरी लहर युवाओं के लिए सबसे ज्यादा घातक सिद्ध हो रही है। इस बार परिवार में ज्यादा लोग संक्रमित हो रहे है, जबकि कोरोना की पहली लहर में बुर्जुग ज्यादा प्रभावित हुए थे।
इस बार अप्रेल माह में अब तक 8922 लोग संक्रमित पाए गए हैं। इनमें ६७२१ पुरुष और २२०१ महिलाएं शामिल हैं। चिकित्सा विभाग के आंकड़ों के अनुसार संक्रमितों में २5 साल तक के ५२५ युवक, ५४५ युवतियां , २५ से 30 साल के ३93 युवक व ३74 युवतियां , 30 से 45 साल के ६55 पुरुष व ५76 महिलाएं, 45 से 60 साल के २२75 पुरुष व ९50 महिलाएं, 60 साल से अधिक के १५४५ पुरुष और १०८४ महिलाएं संक्रमित हुई हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि इसमें कामकाजी युवा ज्यादा संक्रमित हो रहे हैं।
बच्चे भी आ रहे अधिक
इस बार चिंता की बात यह भी है कि बच्चे भी संक्रमण के चपेट में अधिक आ रहे हैं। राहत की बात यह है कि इनमें से किसी भी बच्चे की हालत चिंताजनक नहीं है और ना ही उन्हें अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत पडी हैं।
तेजी से फैल रहा संक्रमण
कोरोना की दूसरी लहर तेजी से फैल रही है। इसकी रफ्तार पिछले साल से चार गुना अधिक है। जनवरी से मार्च तक औसतन रोजाना १० से २५ मरीज मिल रहे थे, जबकि पिछले २७ दिन में ही मरीजों का आंकड़ा ८९२२ पहुंच गया है, जो कि डरावना है। एक अप्रेल को 24 घंटे में ५१ मरीज रिपोर्ट हो रहे थे, वहीं अब 24 घंटे में ३३० से अधिक मरीज आ रहे हैं। चिंता की बात यह है कि जनवरी से मार्च तक केवल २६ मरीज की मौत हुई थी जबकि अप्रेल के 2७ दिनों में ही १२१ मरीजों की मौत हो चुकी हैं।
यह है वजह
15 से 30 साल के उम्र वाले घर से सबसे ज्यादा बाहर निकलते हैं। सार्वजनिक स्थानों पर लोगों से मिलते-जुलते हैं। बाहरी वातावरण में इनका समय ज्यादा गुजरता हैग़्ा इसलिए इन पर संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है। एक वजह यह भी है कि दूसरी लहर आने से पहले 45 से अधिक उम्र वालों को टीका लगाया जा रहा है। वैक्सीनेशन के दोनों चरणों में जोखिम वाले आयुवर्ग के लोगों को टीका लगाकर सुरक्षित दायरे में लाया गया। टीका लगने से इस आयु वर्ग के लोगों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ गई और यह इस महामारी की चपेट में कम आ रहे हैं। एमजीएच अधीक्षक अरुण गौड़ ने बताया कि कोरोना की दूसरी लहर ज्यादा घातक है। पिछली बार की तुलना में इस बार बुजुर्गों से ज्यादा युवा संक्रमित हो रहे हैं। युवाओं की लापरवाही उन्हें कोरोना का शिकार बना रही।