भाजपा ने शनिवार को जारी की दूसरी सूची में भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले के चार विधायकों पर फिर से भरोसा जताया है। भीलवाड़ा से विट्ठलशंकर अवस्थी, मांडलगढ़ से गोपाल खण्डेलवाल (शर्मा), आसींद से जब्बरसिंह सांखला एवं जहाजपुर विधानसभा सीट से गोपीचंद मीणा को चुनाव मैदान में उतारा है।
भाजपा ने शनिवार को जारी की दूसरी सूची में भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले के चार विधायकों पर फिर से भरोसा जताया है। भीलवाड़ा से विट्ठलशंकर अवस्थी, मांडलगढ़ से गोपाल खण्डेलवाल (शर्मा), आसींद से जब्बरसिंह सांखला एवं जहाजपुर विधानसभा सीट से गोपीचंद मीणा को चुनाव मैदान में उतारा है।
इनमें अवस्थी को लगातार चौथी बार भीलवाड़ा सीट से चुनाव लड़ने का मौका दिया। उधर, खण्डेलवाल, सांखला व मीणा भी लगातार दूसरी बार चुनाव मैदान में है। भाजपा इससे पूर्व सहाड़ा से लादूलाल पितलिया व मांडल से उदयलाल भडाणा को प्रत्याशी घोषित कर चुकी है।
जिले की सात विधानसभा सीटों में से भाजपा ने छह पर प्रत्याशी उतार कर तस्वीर साफ कर दी है। शाहपुरा सीट का पेंच फंसा है। यहां के लिए दूसरी सूची में भी पार्टी ने पत्ते नहीं खोले। पार्टी के वरिष्ठ नेता एवं विधायक कैलाश मेघवाल को पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद से शाहपुरा की राजनीति गरमाई हुई है। माना जा रहा है कि भाजपा ने प्रत्याशी चयन में सभी समीकरणों को साधा है। इनमें जाति, वरिष्ठता, अनुभव व छवि को मुख्य आधार माना है। हालांकि चारों ही सीट पर भाजपा के संभावित दावेदारों की सूची लंबी थी, लेकिन छह सीटों के नामों की घोषणा के साथ अटकलें थम गई। हालांकि दूसरी सूची में घोषित प्रत्याशियों के नामों को लेकर खुलकर विरोध सामने नहीं आया है, लेकिन सोशल मीडिया व चौराहों पर कुछ नामों पर सवाल उठाए जा रहे है।
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भीलवाड़ा: बीस साल से भाजपा का कब्जा
भाजपा वर्ष- 2003 से भीलवाड़ा सीट जीतेती आई है। वर्ष-2003 में सांसद सुभाष बहेडि़या चुनाव जीते। उसके बाद वर्ष-2008 से विट्ठलशंकर अवस्थी लगातार इस सीट से तीन चुनाव जीत चुके है। कांग्रेस यहां गत चार चुनाव में भाजपा की सीट में सेंध नहीं मार पाई है। अवस्थी का यह पांचवां चुनाव है। इससे पहले एक बार अवस्थी को पार्टी आसींद से वर्ष-2003 में चुनाव मैदान में उतार चुकी, लेकिन वह चुनाव हार गए थे।
मायने: अवस्थी को चौथी बार टिकट देने के पीछे चुनावी विश्लेषकों का मानना है कि पार्टी ने कई फैक्टर देखकर मैदान में उतारा। इनमें प्रमुख रूप से ब्राह्मण वोटों को साधने, उनके संघ से जुड़े होने और पिछले बार से लगातार जीत के अंतर बढ़ना कारण रहा है।
आसींद: लगातार तीन चुनाव में भाजपा की जीत
आसींद विधानसभा सीट पर वर्ष-2008 से भाजपा का ही कब्जा है। वर्ष-2008 व 2013 में भाजपा के रामलाल गुर्जर लगातार चुनाव जीते। वर्ष- 2018 में भाजपा के ही जब्बरसिंह यहां से चुनाव जीते। पार्टी ने फिर से सांखला को मौका दिया है।
मायने: रावणा राजपूत समाज सांखला को टिकट बनाए रखने की मांग कर रहा था। इसके अलावा पिछले विधानसभा चुनाव में जीत दर्ज कराने से दुबारा मौका मिला। हालांकि पिछले चुनाव में जब्बरसिंह जिले में सबसे कम 154 मतों के अंतर से ही जीते थे।
जहाजपुर: हार-जीत के बदले समीकरण
जहाजपुर विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस व भाजपा के पक्ष में हार-जीत के समीकरण बदलते आए है। यहां वर्ष-2008 में भाजपा के शिवजीराम मीणा चुनाव जीते। वर्ष-2013 में कांग्रेस के धीरज गुर्जर जीते जबकि वर्ष-2018 में हुए चुनाव में भाजपा के गोपीचंद मीणा जीते।
मायने: विधानसभा मीणा बाहुल्य क्षेत्र है। पिछली बार गोपीचंद 13253 के बड़े अंतर से जीते थे। इसके अलावा पांच साल सक्रिय रूप से जनता के बीच रहे।
मांडलगढ़: दोनों पार्टियों में बराबर मुकाबला
मांडलगढ़ विधानसभा क्षेत्र में वर्ष-2008 का चुनाव कांग्रेस के प्रदीप कुमार सिंह ने जीता, वर्ष-2013 में भाजपा की कीर्ति कुमारी जीती। उनके निधन से हुए उपचुनाव में कांग्रेस के विवेक धाकड़ जीते। वर्ष-2018 के चुनाव में फिर भाजपा ने यह सीट जीती। इस बार फिर से भाजपा ने विधायक गोपाल खण्डेलाल को टिकट दिया।
मायने: खंडेलवाल पांच साल क्षेत्र में सक्रिय रहे। पिछले चुनाव में 10333 के अंतर से जीते थे। यहां भी भाजपा से चुनाव लड़ने वाले सम्भावित उम्मीदवारों की सूची लम्बी थी। लेकिन पार्टी ने इनको दुबारा मौका दिया।
कांग्रेस का धाकड़ पर चौथी बार दांव
कांग्रेस की पहली सूची में भीलवाड़ा-शाहपुरा जिले में एक मात्र मांडलगढ़ विधानसभा प्रत्याशी विवेक धाकड़ के नाम पर मुहर लगी है। कांग्रेस ने धाकड को लगातार चौथी बार मैदान में उतारा। धाकड़ पहली बार वर्ष-2013 में चुनाव लड़े, लेकिन भाजपा प्रत्याशी कीर्ति कुमारी ने उनको हराया। कीर्ति कुमारी के निधन के बाद वर्ष-2018 के उपचुनाव में विवेक को फिर मौका मिला। इस बार विवेक ने भाजपा प्रत्याशी शक्तिसिंह हाड़ा पर बड़ी जीत दर्ज की, लेकिन वर्ष-2018 के चुनाव में धाकड़ भाजपा प्रत्याशी गोपाल खण्डेलाल के सामने चुनाव हार गए।
मायने: माना जा रहा है कि कांग्रेस ने युवा के साथ ही जातिगत समीकरण को साधा है। विवेक के पिता कन्हैयालाल धाकड़ लम्बे समय से मांडलगढ़ क्षेत्र की राजनीति से जुड़े हुए है वह जिला प्रमुख भी रहे चुके है।
नहीं लग सका अटकलों पर विराम
कांग्रेस की पहली सूची में राजस्व मंत्री रामलाल जाट व राजस्थान बीज निगम अध्यक्ष धीरज गुर्जर के नाम शामिल होने की अटकलें थी, लेकिन शनिवार को जारी सूची में सिर्फ मांडलगढ़ प्रत्याशी की घोषणा होने से सियासी अटकलें और बढ़ गई। अब सभी की नजरें भीलवाड़ा, सहाड़ा, आसींद, जहाजपुर, शाहपुरा व मांडल पर अटकी है।
आमने-सामने का मुकाबला
मांडलगढ़ विधानसभा सीट के लिए भाजपा व कांग्रेस के प्रत्याशियों की तस्वीर स्पष्ट हो गई है। पांच साल बाद फिर भाजपा प्रत्याशी गोपाल खण्डेलवाल व कांग्रेस प्रत्याशी विवेक धाकड़ आमने-सामने होंगे। यहां उपचुनाव समेत गत चार चुनाव में दो बार भाजपा व दो बार ही कांग्रेस जीती है।
टिकट मिलते ही छाई खुशियां
भाजपा और कांग्रेस की दोपहर में सूची जारी होते ही प्रत्याशियों और कार्यकर्ताओं व समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रत्याशियों के घर बधाई देने वाले पहुंचने लगे। किसी ने मुंह मीठा करवाया तो किसी ने मालाओं से उम्मीदवारों को लाद दिया। इस दौरान कई कार्यकर्ताओं ने आतिशबाजी करके खुशी जताई। प्रत्याशी भी टिकट मिलने के बाद मोबाइल पर बधाई लेते नजर आए और मंदिरों में पूजा-अर्चना भी की।