राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत उन हजारों कार्मिकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जिन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर मकान किराया भत्ता (एचआरए) और शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता का लाभ उठाया है। वित्त विभाग ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि ऑडिट के दौरान पकड़ी गई अनियमित राशि की वसूली अब संबंधित […]
राजस्थान सरकार के विभिन्न विभागों में कार्यरत उन हजारों कार्मिकों की मुश्किलें बढ़ने वाली हैं, जिन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर मकान किराया भत्ता (एचआरए) और शहरी क्षतिपूर्ति भत्ता का लाभ उठाया है। वित्त विभाग ने एक परिपत्र जारी कर स्पष्ट कर दिया है कि ऑडिट के दौरान पकड़ी गई अनियमित राशि की वसूली अब संबंधित कार्मिकों से की जाएगी।
विभाग की ओर से जारी आदेश के अनुसार प्रधान महालेखाकार कार्यालय की ओर से इंटीग्रेटेड फाइनेंशियल मैनेजमेंट सिस्टम की निष्पादन ऑडिट में पाया गया कि कई विभागों में कार्मिकों को नियमों के विपरीत भत्तों का भुगतान हुआ है। इसके साथ ही जीपीएफ, एसआई और आरजीएचएस की कटौती में भी कमियां पाई गई हैं।
सरकार ने साफ किया है कि भुगतान के लिए सीधे तौर पर आहरण वितरण अधिकारी (डीडीओ) जिम्मेदार हैं। वित्त विभाग के अनुसार, आइएफएमएस सिस्टम केवल बिल बनाने और राशि आहरण के लिए एक प्लेटफॉर्म है, लेकिन भुगतान की पात्रता और नियमों की शुद्धता सुनिश्चित करना डीडीओ का काम है।
कई कार्मिकों ने वसूली के आदेशों के खिलाफ राजस्थान सिविल सेवा अपील अधिकरण और न्यायालयों की शरण ली है। इस पर सरकार ने निर्देश दिए हैं कि जहां वसूली न्यायोचित है, वहां कार्यवाही जारी रहे। कोर्ट में चल रहे मामलों के लिए संबंधित विभाग और डीडीओ को ही जवाब प्रस्तुत करने को कहा गया है, क्योंकि भुगतान का दावा उन्हीं के स्तर से प्रस्तुत किया गया था।
वित्त विभाग के शासन सचिव (बजट) राजरम विशाल के हस्ताक्षरित इस आदेश में सभी कोषाधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि जिन मामलों में नियमों के अनुसार वसूली बनती है, वहां संबंधित कार्मिक से रिकवरी सुनिश्चित की जाए। वसूली योग्य राशि के संबंध में डीडीओ की ओर से सक्षम आदेश की प्रति कोषालयों को भेजी जाए। वित्त विभाग के 2 दिसंबर 2025 के आदेश के संदर्भ में ही प्रकरणों का परीक्षण कर निदेशालय को रिपोर्ट भेजी जाए।