
भीलवाड़ा: जिला एवं सेशन न्यायालय ने बुजुर्ग मां की चाकू से हत्या करने के मामले में उसके बेटे को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। न्यायालय ने आरोपी सुनील कुमार विश्नोई को धारा 302 आईपीसी के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद के साथ 20 हजार रुपए के जुर्माने से दंडित किया। मामला भीलवाड़ा जिले के पुर थाना क्षेत्र का है। अभियोजन के अनुसार, 27 अप्रैल 2023 को पिपलेश्वर महादेव क्षेत्र में मंजू देवी की उसके बेटे सुनील कुमार ने चाकू से हमला कर हत्या कर दी थी। पुलिस अनुसंधान में आरोपी द्वारा महिला पर कई वार किए जाने की बात सामने आई थी।
अभियोजन के अनुसार, 27 अप्रैल 2023 को शाम करीब 4 बजे मंजू देवी का भाई विनोद कुमार उससे मिलने उसके घर पहुंचा था। वहां उसने देखा कि मंजू देवी का बेटा सुनील कुमार धारदार चाकू से उसकी मां पर वार कर रहा था। विनोद कुमार के अनुसार सुनील ने उसके सामने ही मंजू देवी का गला काट दिया। उसने बीच-बचाव का प्रयास किया तो आरोपी ने उसे भी जान से मारने की धमकी दी। विनोद कुमार की रिपोर्ट पर पुर थाना पुलिस ने एफआईआर संख्या 108/2023 दर्ज कर धारा 302 और 34 आईपीसी में मामला दर्ज किया और जांच शुरू की।
पुलिस अनुसंधान के अनुसार, घटना के समय मंजू देवी और उसका बेटा सुनील कुमार पुराने मकान में मौजूद थे। मंजू देवी के पति शंकरलाल को उन्होंने सब्जी लाने के लिए बाहर भेजा था। शंकरलाल सब्जी लेने जाने के बजाय कुछ देर गली में एक दुकान पर बैठ गया। इसी दौरान घर में मंजू देवी और सुनील कुमार के बीच कहासुनी हुई और दोनों कमरे में चले गए। पुलिस के अनुसार, सुनील ने कमरे का दरवाजा अंदर से बंद कर लिया और मंजू देवी पर चाकू से हमला किया।
घर में मौजूद साकरी बाई घबरा गई और शंकरलाल को बुलाने के लिए बाहर गई, लेकिन वह नहीं मिला। इसके बाद आसपास के लोगों को घटना की जानकारी हुई। शंकरलाल के घर पहुंचने पर उसने सुनील से दरवाजा खोलने के लिए कहा, लेकिन दरवाजा नहीं खोला गया। इसके बाद वह दरवाजा ऊपर कर कमरे में पहुंचा। इसी दौरान सुनील कमरे से बाहर निकलकर चला गया। पुलिस के अनुसार उसके हाथ-पैर पर खून लगा हुआ था।
जांच के दौरान पुलिस ने आरोपी की सूचना पर घटना में इस्तेमाल चाकू बरामद कर जब्त किया। इसके अलावा आरोपी के घटना के समय पहने कपड़े और मृतका के कपड़े भी जब्त किए गए। आरोपी के हाथ-पैर से खून के नमूने लिए गए। घटनास्थल से भी खून के नमूने गॉज पट्टी के माध्यम से लिए गए और एफएसएल जांच के लिए भेजे गए। मृतका के शव का पोस्टमॉर्टम कराया गया। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण करने के साथ ही प्रत्यक्षदर्शियों और आसपास के लोगों के बयान दर्ज किए।
पुलिस जांच पूरी होने के बाद सुनील कुमार के खिलाफ धारा 302 आईपीसी में चार्जशीट पेश की गई। मामला ट्रायल के लिए सेशन न्यायालय में पहुंचा। अभियोजन पक्ष की ओर से लोक अभियोजक रघुनन्दन सिंह कानावत ने पैरवी करते हुए अदालत में 19 गवाहों के बयान करवाए, 30 दस्तावेज प्रदर्शित किए और 10 आर्टिकल पेश किए। मामले की सुनवाई के बाद सेशन न्यायाधीश अभय कुमार जैन ने सुनील कुमार को धारा 302 आईपीसी में दोषी मानते हुए आजीवन कारावास और 20 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई।