भीलवाड़ा

सोशल मीडिया में उलझा युवा भूल रहा पुरातन ज्ञान, सम्यक ज्ञान ही है मोक्षमार्ग का आधार

आरके कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में धर्मसभा: मुनि प्रणीत सागर ने आत्मकल्याण, स्वाध्याय और ज्ञान की शुद्धता पर दिया जोर

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May 03, 2026
Engrossed in social media, the youth is forgetting ancient knowledge; right knowledge is the basis of the path to salvation.
सोशल मीडिया में उलझा युवा भूल रहा पुरातन ज्ञान, सम्यक ज्ञान ही है मोक्षमार्ग का आधार

भीलवाड़ा शहर के आरके कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में आयोजित विशाल धर्मसभा को संबोधित करते हुए मुनि प्रणीत सागर ने समाज के वर्तमान परिदृश्य पर गहरी चिंता व्यक्त की है। उन्होंने कहा कि आज का युवा वर्ग अपने समृद्ध पुरातन ज्ञान को महत्व नहीं दे रहा। युवा अपना कीमती समय सोशल मीडिया और तात्कालिक मनोरंजन में व्यतीत कर रहा है। इससे उसकी भारी बौद्धिक व सांस्कृतिक क्षति हो रही है। मुनि ने दिगम्बर जैन धर्म में सम्यक ज्ञान को मोक्षमार्ग का प्रमुख आधार बताते हुए इसे आत्मकल्याण की कुंजी बताया।

धर्मसभा में सम्यक ज्ञान के विभिन्न अंगों की विस्तृत विवेचना करते हुए मुनि ने कहा कि सम्यक ज्ञान वही है, जो जीव को हित की प्राप्ति कराए और अहित से बचाए। यह ज्ञान व्यक्ति को सत्य के मार्ग पर अग्रसर करता है। सम्यक ज्ञान का मूल स्वरूप वस्तु को यथार्थ रूप में जानना है। इसमें न तो कोई संशय होता है, न विपरीत बोध और न ही अपूर्णता।

पांच प्रकार का होता है ज्ञान

जैन दर्शन के अनुसार ज्ञान को पांच प्रकारों में विभाजित किया है। मति ज्ञान, श्रुत ज्ञान, अवधि ज्ञान, मनःपर्याय ज्ञान और केवल ज्ञान। मुनि ने बताया कि मति एवं श्रुत ज्ञान सामान्य जीवों के लिए उपलब्ध होते हैं, जबकि अवधि और मनःपर्याय ज्ञान उच्च साधना के बाद ही प्राप्त होते हैं। केवल ज्ञान सर्वोच्च अवस्था है, जो अनंत और पूर्ण होता है; यह केवल अरिहंत भगवान को ही प्राप्त होता है। दिगम्बरपरम्परा में मुनिराजों के 28 कृतिक्रम होते हैं। इनमें 12 सीधे स्वाध्याय से संबंधित हैं। मुनिराज चित्त को निर्मल और ज्ञान को शुद्ध रखने के लिए तड़के तीन बजे उठकर स्वाध्याय करते हैं। संशय, विपर्यय, अनध्यवसाय और अज्ञान जैसे दोष ज्ञान को विकृत कर देते हैं। सही ज्ञान प्राप्ति के लिए इनसे मुक्त होना अनिवार्य है।

मुनि प्रणीत सागर के सानिध्य में सुबह अभिषेक व शान्तिधारा के बाद अलग से क्लास चलती है। इसमें भी बड़ी संख्या में श्रावक हिस्सा ले रहे है। मुनि प्रणीत सागर इस क्लास के माध्यम से श्रावकों को जीवन किस तरह से जिए इसके बारे में समझा रहे है। आरके कॉलोनी दिगम्बर जैन मंदिर में धर्मसभा: मुनि प्रणीत सागर ने आत्मकल्याण, स्वाध्याय और ज्ञान की शुद्धता पर दिया जोर

Published on:
03 May 2026 09:38 am