3 मई 2026,

रविवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

फर्जीवाड़े पर नकेल: स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रवेश नियम हुए सख्त

फर्जी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर इस कोटे का लाभ उठाने वालों पर विभाग ने पूरी तरह से रोक लगा दी है

2 min read
Google source verification
Crackdown on fraud: Admission rules for children with special needs in schools tightened

फर्जीवाड़े पर नकेल: स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चों के प्रवेश नियम हुए सख्त

समावेशी शिक्षा के तहत प्रदेश के सरकारी विद्यालयों में विशेष आवश्यकता वाले बालक-बालिकाओं के प्रवेश को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतते हुए नए और पारदर्शी दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब स्कूलों में विशेष आवश्यकता वाले बच्चे श्रेणी के तहत बिना वैध प्रमाण-पत्र के प्रवेश नहीं मिलेगा। फर्जी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर इस कोटे का लाभ उठाने वालों पर विभाग ने पूरी तरह से रोक लगा दी है। शिक्षा विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने इस सम्बंध में आदेश जारी किए।

प्रवेश के लिए सक्षम प्राधिकारी का प्रमाण-पत्र जरूरी

शारीरिक, मानसिक, बौद्धिक या संवेदनात्मक दिव्यांगता से ग्रस्त विद्यार्थियों को विशेष आवश्यकता वाले बच्चे श्रेणी में तभी प्रवेश मिलेगा, जब उनके पास सरकारी अस्पताल, चिकित्सा बोर्ड या अधिकृत संस्था के सक्षम प्राधिकारी की ओर से जारी वैध प्रमाण-पत्र होगा। प्रस्तुत किए जाने वाले दिव्यांगता प्रमाण-पत्र में दिव्यांगता का प्रकार और उसका प्रतिशत स्पष्ट रूप से अंकित होना अनिवार्य है। विद्यार्थी को उसी श्रेणी में प्रवेश दिया जाएगा जिसका प्रमाण-पत्र प्रस्तुत किया है। प्रवेश प्रक्रिया के दौरान निर्धारित प्रपत्र पर आवेदन लिया जाएगा तथा विद्यालय के संस्था प्रधान या नामित समिति की ओर से प्रमाण-पत्रों का भौतिक सत्यापन किया जाएगा।

प्रमाण-पत्र नहीं तो 30 दिन की मोहलत

विभाग ने अभिभावकों को राहत देते हुए यह भी तय किया कि विशेष परिस्थितियों में यदि कोई अभिभावक प्रवेश के समय प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं कर पाता है, तो उसे अधिकतम 30 दिन का समय दिया जाएगा। यदि इस निर्धारित समयावधि में भी प्रमाण-पत्र प्रस्तुत नहीं किया जाता है, तो विद्यार्थी का प्रवेश विशेष आवश्यकता वाले बच्चे की श्रेणी से निरस्त कर सामान्य श्रेणी में कर दिया जाएगा। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया कि प्रवेश प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरती जाए। यदि प्रवेश के दौरान कोई फर्जी प्रमाण-पत्र पाया जाता है, तो संबंधित प्राधिकारी को तुरंत सूचित कर कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ विद्यालयों की यह जिम्मेदारी होगी कि वे ऐसे विद्यार्थियों के लिए रैम्प और विशेष शिक्षण सामग्री जैसी आवश्यक सुविधाएं स्कूल में उपलब्ध करवाएं। इस नई व्यवस्था से सभी को फायदा होगा। वही सभी को हर तरह की सुविधा भी मिल सकेगी। फर्जी या अपूर्ण दस्तावेजों के आधार पर इस कोटे का लाभ उठाने वालों पर विभाग ने पूरी तरह से रोक लगा दी है