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अरावली क्षेत्र में अवैध लीज मामले में बड़ी कार्रवाई, रवन्ना और खदान का काम-काज बंद

सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद मिलीभगत से कर दिया था एग्रीमेंट, अतिरिक्त खान निदेशक ने लीज ट्रांसफर रद्द करने के मांगे प्रस्ताव, दोषियों की रिपोर्ट तलब

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Major action in illegal lease case in Aravalli region, Ravana and mine operations stopped

अरावली क्षेत्र में अवैध लीज मामले में बड़ी कार्रवाई, रवन्ना और खदान का काम-काज बंद

अरावली पोलीगोन क्षेत्र में सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद मिलीभगत कर खनन लीज देने के मामले में खनिज विभाग में हड़कंप मचा है। राजस्थान पत्रिका के शनिवार के अंक में अरावली पोलीगोन क्षेत्र में दे दी खनन लीज शीर्षक से प्रकाशित समाचार के बाद भीलवाड़ा से लेकर उदयपुर और जयपुर मुख्यालय तक के अधिकारियों में हलचल रही। खबर के प्रकाशन के बाद विभाग ने एक्शन लेते हुए खदान के ऑनलाइन रवन्ना बंद कर दिए हैं और वहां काम-काज पूरी तरह से रुकवा दिया है। उदयपुर के उच्च अधिकारियों ने शनिवार सुबह ही इस गंभीर मामले में सख्ती दिखाते हुए भीलवाड़ा के अधीक्षण खनिज अभियंता ओपी काबरा से तथ्यात्मक रिपोर्ट तलब की। अतिरिक्त खान निदेशक ने लीज ट्रांसफर को रीवोक (रद्द) करने के प्रस्ताव मांगे हैं और साथ ही यह भी पूछा है कि इस पूरे फर्जीवाड़े में कौन-कौन अधिकारी और कर्मचारी दोषी हैं। खनिज विभाग भीलवाड़ा के अधिकारियों के अनुसार पत्रिका में मामला उजागर होने के बाद जिले की करेड़ा तहसील के रिछी का बाड़िया स्थित 2.4115 हैक्टेयर की ग्रेनाइट लीज 115/2021 को तुरंत बंद करने के आदेश जारी कर दिए हैं।

रोक के बावजूद ऐसे हुआ खेल

यह लीज आर. रुक्मीणीअश्वध निवासी-बैंगलोर के नाम पर 29 जनवरी 2024 को 50 साल के लिए स्वीकृत की गई थी। इस लीज का संविदा निष्पादन (एग्रीमेंट) 7 जून 2024 को किया गया और पंजीयन 13 जून को हुआ। इसके साथ ही यह खनन पट्टा 13 जून 2024 से 50 वर्ष की अवधि के लिए प्रभाव में आ गया। बड़ा सवाल यह है कि इस बीच 9 मई 2024 को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली हिल्स पोलीगोन में आने वाली सभी लीज के नए एग्रीमेंट करने पर रोक लगा रखी थी। इसके बावजूद खनिज विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने लीज मालिक से कथित मिलीभगत करके रोक की अनदेखी की और लीज एग्रीमेंट कर डाला। विभाग की मेहरबानी यहीं नहीं रुकी। एग्रीमेंट के बाद इस लीज को अनामिका स्टोंस प्रो. आनन्द किशोर सारस्वत, निवासी जयपुर के पक्ष में हस्तांतरित कर दिया गया।

मुख्य बिन्दू

  • - सुप्रीम कोर्ट की रोक के बावजूद मिलीभगत से कर दिया था एग्रीमेंट
  • - अतिरिक्त खान निदेशक ने लीज ट्रांसफर रद्द करने के मांगे प्रस्ताव, दोषियों की रिपोर्ट तलब