- मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव ने कलक्टर से मांगी रिपोर्ट- परिषद ने किया करीब 60 लाख का भुगतान, अन्य संस्थाओं ने किया विरोध- एक श्वान की नसबंदी पर 1090 रुपए व्यय
भीलवाडा. शहर की जनता आवारा श्वान से परेशान है। इनकी संख्या बढ़ रही। नगर परिषद सालों से श्वानों की नसबंदी की सोच रही, लेकिन संस्था नहीं मिल रही। हाल ही में एक संस्था सामने आई लेकिन उसका पंजीयन नहीं होने तथा गड़बड़ी करने पर उसका ठेका निरस्त कर दिया। इसके बाद भी परिषद ने उसे 60 लाख का भुगतान कर दिया। इस गड़बड़ी के मामले में मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव ललित कुमार ने जिला कलक्टर को पत्र लिखकर संतुलन जीव कल्याण एनजीओ की ओर से नगर परिषद में संचालित एनिमल बर्थ कंट्रोल प्रोग्राम में कथित अनियमितता की रिपोर्ट मांगी है।
श्वान को पालने वाली ज्योति खंडेलवाल ने बताया कि भीलवाड़ा में जिस संस्था को नगर परिषद ने काम दिया वह भारतीय जीव जन्तु कल्याण बोर्ड से पंजीकृत नहीं है। फिर भी संस्था ने 1090 रुपए की दर से काम किया। संस्था की ओर से रीको में जो सेन्टर बनाया गया। वहां रखे गए श्वान को खाने को कुछ भी नहीं देने कुछ श्वान की मौत हो गई थी। इसे लेकर कुछ स्थानीय संगठनों ने कलक्ट्रेट पर प्रदर्शन भी किया था। उसके बाद प्रशासन हरकत में आया और ठेका निरस्त कर दिया। इसके बावजूद संस्थान को 60 लाख का भुगतान कर दिया गया। उधर संतुलन जीव कल्याण एनजीओ के डॉ. नवीस मेहरा ने बताया कि उनकी संस्था पंजीकृत है, लेकिन अज्ञानता के चलते कुछ संस्थाओं की शिकायत के बाद काम बंद कर दिया है।
ठेका निरस्त, नई निविदा जारी होगी
संतुलन जीव कल्याण एनजीओ का काम सही नहीं होने पर ठेका निरस्त कर दिया है। फिर से निविदाएं जारी की जाएगी। श्वान की नसबंदी करवाई जाएगी।
- हेमाराम, आयुक्त, नगर परिषद, भीलवाड़ा