भीलवाड़ा

मिठाई कारोबार को लगेंगे पंख, दोगुनी बिकने की आस

दीपोत्सव: मिठाई बनाने का काम तेजआम दिनों से तिगुना हुई मावे की खपत10 करोड़ रुपए का मिठाई व्यवसाय इस बार होने की उम्मीद05 करोड़ रुपए की मिठाई बिकी थी पिछली दिवाली पर

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Oct 07, 2022
मिठाई कारोबार को लगेंगे पंख, दोगुनी बिकने की आस

भीलवाड़ा. दिवाली के दिनों में मिठाई बाजार को पंख लग जाते हैं। खासकर ड्राईफ्रूट व मावे से बनी मिठाई की खपत तीन गुना तक बढ़ जाती है। शहर में कारोबारी अभी से मिठाई बनाने में जुट गए हैं। दीपावली तक शहर में करीब 2 लाख किलो मावा की खपत होगी। करीब 10 करोड़ की मिठाई का कारोबार होगा। दीपावली के 17 दिन पहले से मावे की खपत बढ़ने लगी है। यह आम दिनों से लगभग 3 गुना ज्यादा है। दीपोत्सव को लेकर बाजार तैयार हो गए। सबसे ज्यादा गहमागहमी मिठाई विक्रेताओं के यहां है।

व्यापारियों का कहना है कि बाजार में उमड़ रही खरीदारी की भीड़ देखते दीपोत्सव पर कारोबार 10 करोड़ रुपए तक का पहुंचने की उम्मीद है। पिछले वर्ष मिठाई का कारोबार पांच करोड़ रुपए हुआ था। कारोबारी मानते हैं कि कोरोना के दो साल बाद दिवाली को लेकर लोगों में उत्साह को देखते पिछली बार से दोगुनी मिठाई बिकने की आस है।
अनुमान के अनुसार जिले भर में करीब तीन हजार हलवाइयों की दुकानें हैं। शहर के चार दर्जन बड़े मिठाई विक्रेताओं के गोदाम से लेकर दुकान तक दिन-रात मिठाई बनाई जा रही है। भीलवाड़ा की मशहूर बालूशाही, काजू कतली, बादाम कतली, ड्राईफ्रूट मिठाई, बेसन की चक्की, सोनपपड़ी की मांग ज्यादा रहती है। असल में ये मिठाइयां एक सप्ताह तक चल सकती और खराब नहीं होती।

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सामाजिक संगठन भी बनवाते हैं

शहर में 90 फीसदी मिठाई हलवाई बनाते हैं, वहीं अन्य का निर्माण सामाजिक संस्थाओं, जैन व माहेश्वरी समाज की ओर से कराया जाता है। शहर में 50 से 60 हजार मकान या परिवार हैं। इनमें कम से कम दीपावली तक 4 से 5 किलोग्राम मिठाई जाती है। इस आधार पर 2 लाख किलो मिठाई बिकती है। जिले की बात करे तो यह आंकड़ा तीन लाख किलो से अधिक होता है।
आर्डर पर बनती मिठाइयां

छीतरमल लढ़ा ने बताया कि शहर व जिले में कई तरह के उद्योग है। इनमें डेढ से दो लाख श्रमिक काम करते हैं। बड़ी फैक्ट्रियां, ग्राम सहकारी समिति के चुनाव लड़ रहे प्रत्याशी सहित अन्य व्यापारिक लोग अपने मिलने वालों को दीपावली पर मिठाई बांटने के लिए उनकी पैकिंग के आर्डर देने लगे हैं। मिठाई के काउंटर भी अगले सप्ताह से लगने लगेंगे।
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मरके की लगेगी दुकानें
दशहरे के दो दिन बाद से ही शहर में जगह-जगह मूंग व उड़द की दाल के मरके बनाने की दुकानें लग जाती है। यह दुकानें दीपावली के बाद तक चलती है। इन मरकों को लोग चाव से खाते हैं। दीपावली के पूजा में अधिकांश लोग मरके ही मिठाई के रूप में रखते हैं।

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ड्राई फ्रूट का चलन बढ़ा

महेन्द्र हलवाई का कहना है कि बाजार में ड्राई फ्रूट का चलन बढ़ा है। बावजूद इसके त्योहार पर मिठाई का अपना महत्व है। हालांकि ग्राहकों की पसंद देख उन्होंने भी अपने यहां मेवा मिश्रित मिष्ठान के साथ ड्राई फ्रूट के पैकेट बनवाने शुरू किए। बड़ी मात्रा में बालूशाही तैयार होती है।

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सफाई का विशेष ध्यान

पांच दिवसीय दीपोत्सव मिठाई जमकर बिकती है। साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखा जाता है। बाजार में 10 करोड़ रुपए से अधिक की मिठाई बिकने की उम्मीद है। पिछले वर्ष करीब पांच करोड़ की मिठाई बिकी थी।

राजेश शाह, मिठाई व्यापारी

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सहकार भारती बनाती है मिठाई

केसर काजू कतली, बादाम कतली, गोंदपाक चक्की, बेसन चक्की, ड्राई फ्रूट व्हाइट कंपाउंड चक्की, चॉकलेट चक्की आदि मिठाई बनाते हैं। पिछले साल करीब 10 हजार किलोग्राम मिठाई बनाई थी।

सुनील सोमानी, प्रदेश महामंत्री सहकार भारती

Published on:
07 Oct 2022 10:09 am
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