भीलवाड़ा

सीएम सॉब, एमजी चिकित्सालय की व्यवस्था की भी लें सुध

मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी के बाद तीसरी बार सोमवार को भीलवाड़ा जिले में आ रहे है। इस बार गहलोत सोमवार सुबह करेड़ा में आएंगे एवं मेगा चिकित्सा शिविर का अवलोकन कर सभा को सम्बोधित करेंगे। इधर, जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद जिला चिकित्सालय महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय के सरकार के सुध नहीं
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Take care of arrangement of CM Sob, MG Hospital
Take care of arrangement of CM Sob, MG Hospital

सीएम सॉब, एमजी चिकित्सालय की व्यवस्था की भी लें सुध

नरेन्द्र वर्मा
भीलवाड़ा। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत प्रदेश में कांग्रेस सरकार की वापसी के बाद तीसरी बार सोमवार को भीलवाड़ा जिले में आ रहे है। इस बार गहलोत सोमवार सुबह करेड़ा में आएंगे एवं मेगा चिकित्सा शिविर का अवलोकन कर सभा को सम्बोधित करेंगे। सरकार के भीलवाड़ा में आने से जिले में मौजूदा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य सेवाओं में और विस्तार तथा नई चिकित्सा सुविधा जुटने की उम्मीद फिर से जिले के बाशिन्दों की जगी है। इधर, जिला मुख्यालय पर मेडिकल कॉलेज होने के बावजूद जिला चिकित्सालय महात्मा गांधी राजकीय चिकित्सालय के सरकार के सुध नहीं लेने से पीडि़त लोग व परिवार जिले से बाहर की दौड़ लगाने को मजबूर है।

भीलवाड़ा में मेडिकल कॉलेज खुले एक वर्ष से अधिक समय हो गया है, लेकिन मेडिकल कॉलेज को लेकर मेडिकल कौंसिल ऑफ इंडिया (एमसीआई)के मापदंड के मुताबिक जो चिकित्सा सुविधा एवं संसाधन जिले के सबसे बड़े महात्मा गांधी राजकीय महात्मा गांधी चिकित्सालय में जुटनी चाहिए, वो अभी भी सपना बनी हुई है। जिले के लोगों को गंभीर बीमारियों के परामर्श एवं उपचार के लिए या तो जिले से बाहर का रूख करना पड़ रहा है, या फिर निजी चिकित्सालयों में उपचार के लिए मोटी राशि खर्च करनी पड़ रही है।

कोर्डियोलोजिस्ट ही नहीं
जिले में हद्य रोगियों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है, महात्मा गांधी चिकित्सालय में रोजाना ५० से अधिक रोगी उपचार के लिए पहुंच रहे है। हद्य रोगियों के लिए चिकित्सालय में आईसीयू व सीसीयू के विशेष वार्ड भी है, लेकिन कोर्डियोलोजिस्ट ही नहीं है। हद्यरोगियों की चिकित्सा सेवा में फिजिशियन ही जुटे हुए है। एेसे में हद्य घात की परिस्थिति कई मरीजों के लिए जानलेवा साबित होती है।

कैथ लेब का ना अता ना पता

जिला चिकित्सालय में हद्य रोगियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए इक्को व टीएमटी की जांच सुविधा है, लेकिन कैथ लेब नहीं है। कैथ लेब के अभाव में एंजियोग्राफी एवं एंजियोप्लास्ट की सुविधा यहां नहीं है। दोनों प्रमुख जांच एवं उपचार के लिए रोगी व परिजनों को निजी चिकित्सालय की राह नापनी पड़ रही, ये दोनों चिकित्सा सुविधा महंगी होने से आर्थिक बोझ भी उठाना पड़ रहा है।

कैंसर रोग में नहीं मिल रही मदद
कैंसर रोग भी जिले में अपने पैर पसार रहा है। यहां जिला चिकित्सालय में रोजाना ३० से अधिक रोगी कैंसर के उपचार या थैरेपी लेने पहुंच रहे है। कैंसर रोग विशेषज्ञ का अभाव होने से पीडि़त व उनके परिजनों को परामर्श के लिए ही जिले से बाहर जाना पड़ रहा है। एेसे में कैंसर पीडि़तों को रोग के उपचार के लिए लम्बा समय व दूरी भारी पड़ रही है।

न्यूरो सर्जन की कमी से हो रही मौतें

जिले में सड़क हादसों में सिर पर चोट लगने से घायलों की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। मौत का आंकड़ा भी बढ़ा है। पुलिस व चिकित्सा विभाग के आंकड़े बताते है कि जिले में सड़क हादसे में रोजाना पांच लोगों की मौत हो रही है। इनमें मौत का मुख्य कारण सिर में गंभीर चोंटे आना है। मेडिकल कॉलेज एवं ए श्रेणी का जिला चिकित्सालय होने के बावजूद यहां न्यूरो रोग विशेषज्ञ या न्यूरो सर्जन नहीं है। एेसे में सड़क हादसे में घायल लोगों के सिर में पहुंची चोट की गंभीरता का समय रहते पता नहीं चल पाता। यहां एमआरआई मशीन होने के बावजूद उसकी उपयोगिता साबित नहीं हो पा रही है।

हेयर ट्रांसप्लांट कागजों में
एमसीआई के नियमानुसार जिला चिकित्सालय में हेयर ट्रांसप्लांट की सुविधा भी संभव है, लेकिन ये सुविधा नहीं होने से बालों के झडऩे की समस्या के समाधान के लिए लोग बड़ी रकम खर्च कर जिले के बाहर उपचार के लिए जा रहे है। निजी चिकित्सालयों में भी हेयर प्लांट की सुविधाएं है, लेकिन वो काफी मंहेगी है।

मोटापा रोग का नहीं मिल रहा इलाज

मोटापा अब शारीरिक व्याधि होने के साथ जानलेवा भी होने लगा है। मोटापा के उपचार के लिए मेडिकल कॉलेज के मापदंड के अनुरूप जिला चिकित्सालय में बेराईटिक चिकित्सा होनी चाहिए, लेकिन ये चिकित्सा सुविधा उपलब्ध नहीं है, एेसे में शरीर से अनावश्यक बढ़ी चर्बी से पीडि़त लोगों को परेशानी झेलनी पड़ रही है।

शहरी डिस्पेंसरी में चिकित्सक जुगाड़ पर
भीलवाड़ा शहर में सुभाषनगर, काशीपुरी, चन्द्रशेखर आजाद नगर तथा उपनगर सांगानेर व पुर में शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र है, लेकिन अधिकांश में स्थाई चिकित्सकों की नियुक्ति नहीं है। एेसे में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी एवं अधीक्षक को स्वास्थ्य केन्द्र संचालित करने के लिए महात्मा गांधी चिकित्सालय से ही चिकित्सकों की नियुक्ति कुछ दिनों के लिए अस्थाई रूप से करनी पड़ रही है। यहां चिकित्सकों के अवकाश के दिनों में डिस्पेंरी नर्सिग स्टाफ के सहारे ही चलती है।

सरकार को भेजे रखें है प्रस्ताव

जिला चिकित्सालय में आधुनिक चिकित्सा उपकरणों सुविधा जुटे, इसके लिए सरकार को लिखा गया है। चिकित्सालय भवन का कुछ हिस्सा वर्ष १९३८ के जमाने का होने से भी नए भवन निर्माण के लिए बजट सरकार से मांगा है। मेडिकल कॉलेज में विद्यार्थियों के होस्टल में कक्षों की संख्या बढ़े, इसके लिए भी प्रस्ताव भिजवा रखे है।
राजन नंदा, प्राचार्य, मेडिकल कॉलेज भीलवाड़ा

आधुनिक चिकित्सा संसाधन मिलें

जिला चिकित्सालय होने से यहां सभी प्रकार की आधुनिक चिकित्सा संसाधन होने चाहिए, विशेषज्ञ व वरिष्ठ चिकित्सकों की भी नियुक्ति होनी चाहिए। नर्सिग कर्मियों को पे ग्रेड के आधार पर समय रहते राजपत्रित अधिकारी का दर्जा मिलना चाहिए
महेन्द्र सिंह संरक्षक, लक्की ब्यावट जिलाध्यक्ष, राजस्थान नर्सिग यूनियन, एसोसियेशन

Published on:
04 Nov 2019 06:09 am