सोना-चांदी में खरबों रुपए के झटके से सहमे बाजार और महंगाई की मार झेल रही जनता के बीच रविवार, 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट देश के साथ-साथ ‘टेक्सटाइल सिटी’ भीलवाड़ा के लिए भी बेहद खास होने वाला है। देश में पहली बार रविवार को पेश हो रहे इस बजट पर भीलवाड़ा के […]
सोना-चांदी में खरबों रुपए के झटके से सहमे बाजार और महंगाई की मार झेल रही जनता के बीच रविवार, 1 फरवरी को पेश होने वाला केंद्रीय बजट देश के साथ-साथ 'टेक्सटाइल सिटी' भीलवाड़ा के लिए भी बेहद खास होने वाला है। देश में पहली बार रविवार को पेश हो रहे इस बजट पर भीलवाड़ा के उद्योग जगत से लेकर आम आदमी तक की निगाहें टिक गई हैं।
सालाना 40 हजार करोड़ का टर्नओवर और 8 हजार करोड़ से अधिक का निर्यात करने वाले इस औद्योगिक हब को वित्त मंत्री से 'बूस्टर डोज' की दरकार है। उद्यमियों का साफ मानना है कि यदि बजट में भीलवाड़ा के लिए 'मेगा टेक्सटाइल पार्क' की घोषणा होती है, तो यह शहर वैश्विक पटल पर चीन और वियतनाम जैसे देशों को सीधी टक्कर देने का माद्दा रखता है। महंगाई से राहत की आस युवाओं और महिलाओं की नजरें भी बजट पर हैं। रसोई के बजट को संभालने के लिए महंगाई पर लगाम और टैक्स स्लैब में बदलाव की उम्मीद आम आदमी लगाए बैठा है।
फ्रेट टर्मिनल और एयरपोर्ट की आस उद्योगों की रफ़्तार बढ़ाने के लिए कनेक्टिविटी सबसे बड़ी बाधा है। उद्यमियों को उम्मीद है कि मंडपिया से हमीरगढ़ के बीच नया रेलवे फ्रेट टर्मिनल स्थापित करने की घोषणा इस बजट में हो सकती है। इसके अलावा, भीलवाड़ा और चित्तौड़गढ़ के बीच स्थित हमीरगढ़ हवाई पट्टी को नागरिक हवाई अड्डे में अपग्रेड करने की मांग ने भी जोर पकड़ रखा है। इससे देश के बड़े शहरों से सीधा जुड़ाव हो सके।
उद्योगों के लिए 'टेढ़ी खीर' बनी एनओसी भीलवाड़ा के उद्योगों के सामने सबसे बड़ा संकट 'पानी' है। रीको क्षेत्रों में पानी की कोई ठोस नीति नहीं होने के कारण उद्योग पूरी तरह भूजल पर निर्भर हैं, जहां एनओसी मिलना 'टेढ़ी खीर' साबित हो रहा है। उद्यमियों ने मांग की है कि केंद्रीय बजट में औद्योगिक जल प्रबंधन के लिए विशेष फंड या नीतिगत छूट का प्रावधान किया जाए, ताकि टेक्सटाइल सिटी का चक्का न थमे।
शिक्षा और रोजगार पर हो फोकस "आम बजट संतुलित होना चाहिए ताकि इसका फायदा हर वर्ग को मिले। शिक्षित बेरोजगारों की फौज बढ़ती जा रही है, उन्हें रोजगार नहीं मिल पा रहा। बजट में स्कॉलरशिप और रोजगार सृजन के ठोस उपाय होने चाहिए, जिससे युवाओं को हताशा से निजात मिल सके।
बजट से उम्मीदें