भीलवाड़ा

कोरोना काल में टेक्सटाइल पर आया संकट

संभागीय आयुक्त को बताई औद्योगिक समस्या

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Jul 30, 2021
कोरोना काल में टेक्सटाइल पर आया संकट

भीलवाड़ा।
कोरोना महामारी में टेक्सटाइल के साथ स्थानीय उद्योगों के सामने संकट खड़ा हो गया। उद्योगों के सामने कई समस्याएं खड़ी है। इनका सरकार के स्तर पर समाधान नहीं हुआ तो उद्योग चलाना मुश्किल होगा। यह बात उद्यमियों ने गुरुवार को अजमेर में संभागीय आयुक्त वीणा प्रधान की अध्यक्षता में औद्योगिक सलाहकार समिति की बैठक में कहीं। इसमें भीलवाड़ा के औद्योगिक संगठनों ने हिस्सा लिया।
भीलवाड़ा टेक्सटाइल ट्रेड फेडरेशन के कार्यकारी अध्यक्ष अतुल शर्मा ने बताया कि भीलवाड़ा में कोरोना काल से पहले आठ करोड़ मीटर कपड़े का उत्पादन प्रतिमाह होता था। टेक्सटाइल का १८ हजार करोड़ का वार्षिक टर्न ओवर है। लेकिन इन डेढ़ सालों में वस्त्र उद्योग संकट में आ गया है।
इनका समाधान जरूरी
उद्यमियों ने कहा कि राज्य में बिजली की दर वस्त्र उद्योग के लिए देश में सबसे ज्यादा है। सरकार सैस व सरचार्ज के रूप में भारी रकम वसूल रही है। फ्यूल चार्ज भी अधिक वसूला जा रहा है। सोलर एनर्जी के लिए सरकार ने 2019 में नीति की घोषणा की थी। भीलवाड़ा के १५० से उद्योग ने सोलर एनर्जी में निवेश कर रूफटाप में निवेश किया। गत वर्ष नेट मीटरिंग व ग्रोस मीटरिंग के कारण नए सोलर एनर्जी के निवेश पर असर पड़ा है। 30 जून को उर्जा विभाग ने 60 पैसे प्रति यूनिट को 1 अप्रेल 2020 से वसूलने के आदेश जारी कर दिए। इसे हटाना चाहिए। वस्त्र उद्योग को अन्य राज्यों की तरह 2 से 3 रुपए प्रति यूनिट की सब्सिडी दी जानी चाहिए।
दोनो विभागों के नियमों में अन्तर
भीलवाड़ा में कॉटन व ड्रेनिम उद्योग की प्रबल संभावना है। वर्तमान समय में डेढ से दो करोड़ मीटर का उत्पादन हो रहा है। इसके विकास में रीको व जिला उद्योग केन्द्र भूमि उपलब्ध कराता है पर इन दोनों की कार्य प्रणाली अलग है। इन्हें एक करना आवश्यक है। उद्योग केन्द्र के नियमों में उद्योग की आवश्यकता के अनुसार संशोधन किया जाए। रीको अपने भूखण्डों में उत्पाद परिवर्तन की अनुमति एवं उद्यमी द्वारा विक्रय किए जाने पर विक्रय की अनुमति, नामान्तरण का अधिकार स्थानीय जिला स्तर पर ही कर दिया जाता है। उद्योग केन्द्र में इस प्रकार के नियम नहीं होने के कारण उद्यमियों को परेशानी होती है। उद्योग को भूमिगत जल की जगह ऊपरी स्तरीय जल की उपलब्धता के आधार पर उद्योग चलाने की अनुमति मिलनी चाहिये। रिको हमीरगढ़ ग्रोथ सेन्टर में सिक्सलेन के कार्य के साथ पीडब्ल्यूडी. द्वारा ओवरब्रिज निर्माणाधीन है। जिसका कार्य काफी धीमी गति पर है। चम्बल का पीने का पानी ग्रोथ सेन्टर में नहीं मिल पा रहा है। जबकि उद्यमी 10 पैसा बिजली के बिल वाटर सैस के नाम से भी सरकार को देते है। जो 1 मेगावाट के उद्योग को लगभग 6 लाख रुपए एक साल के वसूले जा रहे है। बैठक में सिन्थेटिक्स विविंग मिल्स एसोसिएशन के अध्यक्ष संजय पेडिवाल, लद्यु उद्योग भारती के केके जिन्दल, समेत अन्य उद्यमी उपस्थित थे।
रीको के नोटिस का विरोध
सिन्थेटिक्स विविंग मिल्स एसोसिशन के अध्यक्ष संजय पेडिवाल ने प्रधान को बताया कि रीको १५ साल पुराने उद्यमियों को नोटिस जारी कर रहा है। ये भूखण्ड आवंटन के तीन साल में उत्पादन नहीं करने को लेकर जारी किए जबकि भूखण्ड १५ साल पहले आंवटित किए थे। इसका कड़ा विरोध किया गया। जिला कलक्टर के भी ध्यान में लाया गया है। रीको क्षेत्र में विद्युत विभाग बिना किसी सूचना के ट्रीपिंग कर रहा है। इसके कारण मशीनों में नुकसान होने के साथ उत्पादन प्रभावित हो रहा है। प्रतिदिन विद्युत लाइनों में फोल्ट आने से एक से तीन घंटे तक बिजली बन्द हो रही है।

Published on:
30 Jul 2021 07:50 am
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