राज्य सरकार ने बजट में खनन क्षेत्र के लिए घोषणाओं का पिटारा तो खोल दिया है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। वर्तमान में संचालित खनिज विभाग के कार्यालय खुद ‘संसाधनों के अभाव’ से जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौजूदा ढांचा ही चरमराया हुआ है, तो नए कार्यालय […]
राज्य सरकार ने बजट में खनन क्षेत्र के लिए घोषणाओं का पिटारा तो खोल दिया है, लेकिन धरातल पर स्थिति इसके उलट है। वर्तमान में संचालित खनिज विभाग के कार्यालय खुद 'संसाधनों के अभाव' से जूझ रहे हैं। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि जब मौजूदा ढांचा ही चरमराया हुआ है, तो नए कार्यालय खोलने का क्या औचित्य? अवैध खनन को रोकने के लिए जिस इच्छाशक्ति और सुरक्षा बल की जरूरत है, वह नदारद है।
ऊपरमाल पत्थरखान व्यवसायी संघ, बिजौलियां के मंत्री रामप्रसाद विजयवर्गीय ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा और वित्त मंत्री को पत्र लिखकर विभाग की विसंगतियों को उजागर किया है। खातेदारी भूमि में खान आवंटन की प्रक्रिया पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
विभागीय सूत्रों का कहना है कि संसाधनों की कमी के कारण वे चाहकर भी फील्ड मॉनिटरिंग नहीं कर पाते। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम न होने से अवैध खनन माफियाओं के खिलाफ कार्रवाई करना जान जोखिम में डालने जैसा है। ऐसे में बजट की घोषणाएं केवल कागजी शेर साबित हो सकती हैं। विजयवर्गीय का कहना है कि सरकार नए दफ्तर खोलने के बजाय मौजूदा कार्यालयों को तकनीकी और मानव संसाधन से मजबूत करे। बिना सुरक्षा और स्टाफ के अवैध खनन रोकना नामुमकिन है। साथ ही प्रीमियम राशि लेने का नियम भी संशोधित होना चाहिए।