निज स्वभाव है सिद्धप्रभु सम, आज मुझे विश्वास हुआ। सारे दर से निराश होकर, प्रभु आपका दास हुआ। इन्हीं पवित्र भावनाओं और गगनभेदी जयकारों के साथ मंगलवार को आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान का शुभारम्भ हुआ। पंडित जयकुमार जैन के निर्देशन में श्रावक-श्राविकाओं ने विधिवत सिद्धचक्र यंत्र […]
निज स्वभाव है सिद्धप्रभु सम, आज मुझे विश्वास हुआ। सारे दर से निराश होकर, प्रभु आपका दास हुआ। इन्हीं पवित्र भावनाओं और गगनभेदी जयकारों के साथ मंगलवार को आरके कॉलोनी स्थित आदिनाथ दिगम्बर जैन मंदिर में आठ दिवसीय सिद्धचक्र महामण्डल विधान का शुभारम्भ हुआ। पंडित जयकुमार जैन के निर्देशन में श्रावक-श्राविकाओं ने विधिवत सिद्धचक्र यंत्र की स्थापना कर श्रीफल अर्पित किए और अनुष्ठान की शुरुआत की।
ट्रस्ट के उपाध्यक्ष चैनसुख शाह ने बताया कि अनुष्ठान की शुरुआत सुबह 8:15 बजे घटयात्रा से हुई। 108 इन्द्राणियों ने मस्तक पर जल कलश धारण कर मंगल यात्रा निकाली। शोभायात्रा मंदिर परिसर से शुरू होकर राजीव गांधी चौराहे सहित शहर के विभिन्न मार्गों से होती हुई पुनः मंदिर पहुंची। मार्ग में जगह-जगह श्रद्धालुओं ने घटयात्रा का स्वागत किया। घटयात्रा का नेतृत्व शची इन्द्राणी बनी नीना पंचोली, कुबेर इन्द्राणी मंजू पाटनी एवं मैना सुन्दरी बनी जम्बू देवी पाटनी ने किया।
घटयात्रा के मंदिर पहुंचने पर धनराज-अजय टोंग्या परिवार ने पूरे विधि-विधान और मंत्रोच्चार के साथ ध्वजारोहण कर धर्म प्रभावना की। इसके पश्चात मंडप का उद्घाटन इन्द्रादेवी व अभिषेक छाबड़ा ने मोलीबंध खोलकर किया। विधान मंडल का शुभारम्भ लादूलाल-राजकुमारी शाह ने पर्दा हटाकर किया।
पंडित जयकुमार शास्त्री के निर्देशन में मंडप शुद्धि और इन्द्र प्रतिष्ठा कराई गईं। इसके उपरांत शुरू हुए विधान पूजन में श्रद्धालुओं ने सिद्ध भगवान के अनन्त दर्शन, अनन्त ज्ञान, अनन्त वीर्य, अनन्त सुख और अनन्त सूक्ष्म सहित अजर-अमर, अपराय आदि 24 गुणों की भावपूर्ण आराधना कर अर्घ्य समर्पित किए। विधान में सौधर्म इंद्र की भूमिका अजय पंचौली ने निभाई, जबकि श्रीपाल का पात्र ज्ञानचन्द पाटनी बने। इनके साथ ही अन्य इंद्र-इन्द्राणियों ने भी उत्साहपूर्वक धार्मिक क्रियाओं में भाग लिया।