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बिजौलिया का 14 करोड़ का माइनिंग स्कैंडल: जांच दबाए बैठे अधिकारी, शासन सचिवालय भी नरम

अवैध खनन घोटाले में सरकार का अल्टीमेटम फिर भी चार माह से फाइल दबाए बैठा है खान निदेशालय

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Bijolia's 14-crore mining scandal: officials suppress investigation, government secretariat also lenient

बिजौलिया का 14 करोड़ का माइनिंग स्कैंडल: जांच दबाए बैठे अधिकारी, शासन सचिवालय भी नरम

भीलवाड़ा जिले के बिजौलिया खनन क्षेत्र (नयानगर) में 14 करोड़ के राजस्व को चपत लगाने वाले बहुचर्चित माइनिंग स्कैंडल में राज्य सरकार अब नरम रुख अपनाए हुए है। मामले की जांच रिपोर्ट पिछले चार माह से खान एवं भूविज्ञान निदेशालय उदयपुर में धूल फांक रही है। शासन सचिवालय जयपुर की ओर से दो बार पत्र लिखने के बावजूद निदेशालय ने कोई जवाब नहीं दिया है।

अधिकारियों की इस घोर लापरवाही और लेटलतीफी पर नाराजगी जताते हुए खान एवं पेट्रोलियम विभाग के संयुक्त शासन सचिव ने खान एवं भूविज्ञान विभाग उदयपुर के निदेशक को स्मरण पत्र-2 रिमाइंडर जारी कर तत्काल निष्कर्षात्मक टिप्पणी के साथ पूर्ण जांच रिपोर्ट तलब की है।

क्या है मामला

खान विभाग के संयुक्त शासन सचिव अरविंद सारस्वत और विशेषाधिकारी श्रीकृष्ण शर्मा के स्तर से जारी इस पत्र के अनुसार, यह मामला बिजौलिया के तत्कालीन खनि अभियंता और तत्कालीन सर्वेयर की ओर से 20 मार्च 2021 को बनाए गए पंचनामे से जुड़ा है। इस पंचनामे में भारी तकनीकी खामियां छोड़ी गई थीं। इस पर 14 मई 2025 को एक शिकायत की गई थी। इस पर भीलवाड़ा के अधीक्षण खनि अभियंता ने 6 नवंबर 2025 को बिंदुवार जांच रिपोर्ट निदेशालय उदयपुर को भेज दी थी। इसके बाद जयपुर मुख्यालय ने 21 नवंबर 2025 और 12 जनवरी 2026 को पत्र लिखकर निदेशालय से पूर्ण जांच रिपोर्ट और टिप्पणी शासन को भिजवाने के निर्देश दिए थे। लगभग चार माह बीतने के बाद भी निदेशालय ने सूचना नहीं भेजी। अब सरकार ने तत्काल प्रभाव से रिपोर्ट भिजवाने का अल्टीमेटम दिया है।

फ्लैशबैक: क्या था 14 करोड़ का स्कैंडल

राजस्थान पत्रिका ने इस मामले को प्रमुखता से उठाया था। नवंबर 2017 में नयानगर की आराजी संख्या 124 में 5 ब्लॉक्स की ऑनलाइन नीलामी हुई थी। इसकी बोली 14 करोड़ रुपए तक गई थी। आरोप है कि सफल बोलीदाताओं को कब्जा सौंपने से पहले ही अधिकारियों की मिलीभगत से वहां अवैध खनन कर लिया और ब्लॉक नंबर एक को पूरा खाली कर दिया गया। इस भारी राजस्व हानि के मामले में सरकार ने 14 करोड़ की चपत लगाने के मुख्य आरोपी तत्कालीन खनि अभियंता पुष्पेन्द्र सिंह को कार्रवाई के बजाए प्रमोशन का इनाम दे दिया।

पंचनामे पर सवाल

भीलवाड़ा कलक्टर के आदेश पर 20 मार्च 2021 को मौके का निरीक्षण कर अवैध खनन की पुष्टि की गई थी। पंचनामे का जिक्र अब सरकार के नए पत्र में है। इस रिपोर्ट को भी 12 दिनों तक दबाए रखा और 1 अप्रेल 2021 को बिजौलिया थाने में एफआईआर दर्ज करवाई गई थी। अब शासन के इस रिमाइंडर के बाद खान निदेशालय इन तकनीकी खामियों और अधिकारियों की मिलीभगत पर रिपोर्ट जयपुर भेजता है या नहीं।