भीलवाड़ा

वस्त्रनगरी की वैश्विक उड़ान, धागों से बुनी आर्थिक समृद्धि

सुरेश जैन राजस्थान का हृदय स्थल कहा जाने वाला भीलवाड़ा आज केवल ‘धर्मनगरी’ या ‘वस्त्रनगरी’ तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टेक्सटाइल और माइनिंग के दम पर देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से ‘टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस’ का दर्जा प्राप्त भीलवाड़ा अत्याधुनिक तकनीक, खनिजों के खजाने और […]

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Feb 28, 2026
The global flight of the textile city, economic prosperity woven from threads
  • 25 हजार करोड़ का कपड़ा कारोबार, राज्य को 33 प्रतिशत खनिज राजस्व दे रही वस्त्रनगरी
  • रोजगार, तकनीक और आस्था के संगम से लिख रहा विकास की नई इबारत

सुरेश जैन

राजस्थान का हृदय स्थल कहा जाने वाला भीलवाड़ा आज केवल 'धर्मनगरी' या 'वस्त्रनगरी' तक सीमित नहीं है, बल्कि यह टेक्सटाइल और माइनिंग के दम पर देश की अर्थव्यवस्था का एक मजबूत स्तंभ बन चुका है। केंद्रीय वाणिज्य मंत्रालय से 'टाउन ऑफ एक्सपोर्ट एक्सीलेंस' का दर्जा प्राप्त भीलवाड़ा अत्याधुनिक तकनीक, खनिजों के खजाने और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के बूते वैश्विक पटल पर मान बढ़ा रहा है। खनन और टेक्सटाइल डेढ़ लाख से अधिक लोगों की आजीविका का साधन बने हुए हैं।

वस्त्रनगरी की ऊंची उड़ान

देश की अत्याधुनिक मशीनों से लैस भीलवाड़ा का टेक्सटाइल उद्योग नित नए कीर्तिमान गढ़ रहा है। राजस्थान की 40 स्पिनिंग मिलों में से 20 भीलवाड़ा में हैं। राज्य के कुल 27 लाख स्पिंडल में से 17 लाख यहीं चल रहे हैं। इससे प्रदेश का 63 प्रतिशत धागा भीलवाड़ा में बनता है। देश में बनने वाले 200 करोड़ मीटर डेनिम में से 50 करोड़ मीटर भीलवाड़ा में तैयार होता है। 400 विविंग इकाइयों में 17 हजार से अधिक विश्वस्तरीय मशीनें लगी हैं। 25 प्रोसेस हाउस 100 करोड़ मीटर कपड़ा प्रोसेस करने की क्षमता है। 125 करोड़ से अधिक का मैनमेड टेक्सटाइल उत्पादन और उद्योग का कुल टर्नओवर 35 हजार करोड़ रुपए के पार है।

खनिजों का खजाना

1930 में पहली माइका खदान के साथ शुरू हुआ खनन का सफर आज नई ऊंचाइयों पर है। राज्य के कुल खनिज राजस्व में अकेले 33 प्रतिशत का योगदान देता है। गोलछा ग्रुप की घेवरिया माइंस से सोप स्टोन का उत्पादन आज भी जारी है। हिंदुस्तान जिंक और जिंदल सॉ जैसी कंपनियां यहां कार्यरत हैं, जो अर्थव्यवस्था को रफ्तार दे रही हैं। प्रतिमाह डीएमएफटी में 400 करोड़ का राजस्व मिलता है।

तकनीक और पर्यावरण संरक्षण

भीलवाड़ा ने केवल उत्पादन ही नहीं, पर्यावरण संरक्षण में भी मिसाल पेश की है। प्रदेश में सबसे पहले मल्टीपल इफेक्ट इवेपोरेटर प्लांट (एमइइ) यहीं लगाए गए। यहा 225 मेगावॉट के रूफटॉप सोलर प्लांट स्थापित कर प्रदेश का सबसे बड़ा सोलर केंद्र बन गया है।

आस्था, पुरातत्व और पर्यटन का अद्भुत संगम

भीलवाड़ा जिले के तीर्थ स्थल जहाजपुर स्वस्तिधाम, चंवलेश्वर, बिजौलियां पार्श्वनाथ मंदिर, आसींद सवाई भोज, मालासेरी डूंगरी तथा कोटड़ीचारभुजानाथ मंदिर लाखों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। पुर की पहाड़ियां, बिजौलियां के ऐतिहासिक जैन मंदिर और मांडलगढ़ का प्राचीन किला पुरातत्व प्रेमियों को लुभाते हैं। बारिश के दिनों में मेनाल का प्राकृतिक झरना प्रदेश भर के पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र बन जाता है।

Published on:
28 Feb 2026 09:32 am
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