भीलवाड़ा

संदेश आते है हमें बड़ा तड़पाते है, तुम घर कब…..

जहाजपुर देश की सरहद पर दुश्मनों के दांत जब भी खट्टे होते है शहीदों के गांव के रूप में देश में जाने वाले गाडौली, टीकड, बावड़ी, अमरवासी, लुहारी, ऊंचा, छाजेलाखेड़ा, गोदान का बाड़ा, सरसिया गांव के लोगों के सीने गर्व से चौड़े हो जाते है। गांव की महिलाएं बताती है कि उन्हें अपने सपूतों व पतियों पर नाज है, लेकिन जब भी उनका संदेश आता है या बात होती है तो वो तड़प उठते है।

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The message comes, we are tortured a lot when you are home

भीलवाड़ा। जहाजपुर देश की सरहद पर दुश्मनों के दांत जब भी खट्टे होते है शहीदों के गांव के रूप में देश में जाने वाले गाडौली, टीकड, बावड़ी, अमरवासी, लुहारी, ऊंचा, छाजेलाखेड़ा, गोदान का बाड़ा, सरसिया गांव के लोगों के सीने गर्व से चौड़े हो जाते है। यह वो गांव है, जिनमें कई परिवार के जवान सरहद पर लड़ते हुए शहीद हो गए और अभी भी कई जवान देश की सुरक्षा के लिए सीना ताने खड़े है। चीन के आंखे दिखाने से इन गांवों से अभी भी एक ही आवाज आती है, कारगिल की कहानी फिर दोहरानी पड़े तो गांवों के सपूत तुम पीछे मत हटना। The message comes, we are tortured a lot when you are home

जहाजपुर उपखंड के गाडौली कस्बे की आबादी छह हजार के लगभग हैं। यहां के प्रत्येक घर में एक या दो जवान सेना से जुड़े हुए हैं। कई युवा सेना में जाने के लिए रोज 10 किलोमीटर पैदल दौड़ कर रैली की तैयारी में जुटे हैं। शहीद ओम प्रकाश परिहार युवाओं के लिए आदर्श बने हुए है। शहीद का परिवार यहां के युवाओं को सेना में जाने के लिए प्रेरित करते हैं। गांव की महिलाएं बताती है कि उन्हें अपने सपूतों व पतियों पर नाज है, लेकिन जब भी उनका संदेश आता है या बात होती है तो वो तड़प उठते है।

वर्तमान समय भी चीन भारत को आंखें दिखा रहा है ऐसे समय में गाडौली क्या युवा, क्या बुजुर्ग, हर कोई चीन को सबक सिखाने के लिए तैयार बैठा है। गाडोली कस्बे में ऐसे भी कई घर हैं जिनमें से एक ही घर से पांच पांच सदस्य सेना में है। इस गांव के कई सपूत देश रक्षा में शहीद हुए है। शहीद ओम प्रकाश परिहार करगिल के अंतिम समय ऑपरेशन विजय में 4 दिसंबर 2000 को अनंतनाग में आतंकियों से लड़ते हुए शहीद हुए। थे।

सैनिकों का गांव कहा जाता है
भीलवाड़ा जिले में सर्वाधिक सैनिक जहाजपुर तहसील से ही आते हैं। गाडौली, टीकड, बावड़ी, अमरवासी, लुहारी, ऊंचा, गोदान का बाड़ा,छाजेला का खेड़ा, सरसिया शहीद तहसील में कई गांव ऐसे हैं जहां कई परिवार सेना से जुड़े हैं और एक ही परिवार के पांच-पांच सदस्य सेना में होकर देश रक्षा कर रहे हैं। शहादत की कहानीटीकड के शिवराम सिंह राजौरी में 30 अगस्त 1998 को शहीद हुए। इसी गांव के जयराम मीणा टीकड़ निवासी 9 जुलाई 1998 राजौरी क्षेत्र में शहीद हुए। इसी प्रकार टीकड़ के जुगराज मीणा, सरसिया के रमेश मीणा, छाजेला का खेड़ा के रतनसिंह की शहादत को देश नहीं भूला है।

Published on:
26 Jul 2020 12:21 pm
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