
भीलवाड़ा. मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने फरवरी में हमीरगढ़ पंचायत को नगर पालिका घोषित किया।स्वायत शासन विभाग ने भी 20 मई को अधिसूचना जारी कर दी। चार माह गुजर गए लेकिन हमीरगढ़ न तो पंचायत और न ही नगर पालिका की तरह काम कर पा रही है क्योंकि न तो उसके पास भवन है और न बजट है। लिहाजा कस्बे के विकास ही नहीं बल्कि त्योहारी सीजन में क्षेत्र की साफ सफाई भी बाधित हो रही है। दशहरा भी आपसी तालमेल से मनाया गया।
मिली जानकारी के अनुसार, पंचायत के सभी रिकॉर्ड को भी पालिका को नहीं सौंपे गए। पालिका अध्यक्ष रेखा राजपूत ने जिला परिषद के सीईओ को गत दिनों पत्र भी लिखा था, लेकिन इसकी सुनवाई भी नहीं हुई। इसके चलते यहां इंदिरा रसोई भी शुरू नहीं हुई और न ही शहरी रोजगार गारंटी योजना का लाभ क्षेत्रीय बेरोजगारों को मिल पा रहा है।
पत्र का मजमून
पालिका अध्यक्ष रेखा ने 29 सितम्बर को सीईओ को लिखे पत्र में कहा कि सरकार ने 20 मई को पंचायत को हमीरगढ पालिका घोषित किया। ग्रामीण विकास एंव ग्राम पंचायत हमीरगढ़ के सम्पूर्ण क्षेत्र को पंचायती राज संस्थाओं की सीमाओ से पृथक करने के आदेश दिए। पंचायत के सभी गांव इसमें शामिल हो गए। पंचायत का फंड, सम्पति, अधिकार व दायित्व नगर पालिका में समाहित हो गए, लेकिन यह अधिकारी पालिका अध्यक्ष व ईओ को नहीं मिले हैं।
दशहरे पर खुद किया खर्चा
पालिका के पास बजट नहीं होने से रावण दहन के लिए भी गांव के लोगों के साथ पालिका अध्यक्ष ने सहायता राशि दी। पालिका बनने के बाद पंचायत ने भी सभी खर्चे बंद कर दिए।
17.19 करोड़ का पहला बजट
पालिका के पास स्वयं का भवन नहीं होने से अध्यक्ष रेखा व ईओ लोकेश चौधरी तहसील कार्यालय में बैठ कर ही काम चला रहे हैं। हालंकि पालिका का पहला बजट भी दो दिन पूर्व तैयार कर चर्चा की गई है। पहला बजट 17 करोड़ 19 लाख का रखा गया, लेकिन जेब में पैसा नहीं आया।
4 माह में कुछ नहीं मिला
हमीरगढ़ को पालिका बना दिया, लेकिन इन चार माह में भवन व बजट नहीं मिला। ऐसे में खुद ही खर्च कर जैसे तैसे काम चला रहे हैं। सीईओ को पालिका में बजट ट्रांसफर करने को पत्र लिखा, लेकिन अभी कुछ भी नहीं हुआ है। एडीएम सिटी को भी पत्र लिखा। दीपावली नजदीक है और कस्बे की सफाई करवानी है, लेकिन बजट नहीं है।
रेखा राजपूत. अध्यक्ष नगर पालिका हमीरगढ़