कमेटी करेगी दौरा व प्रोसेस हाउस संचालकों के साथ चर्चा
भीलवाड़ा जिले में तेजी से गिरते भू-जल स्तर और बढ़ते जल संकट के बीच जिला प्रशासन ने एक क्रांतिकारी कदम उठाया है। भीलवाड़ा के प्रोसेस हाउस को अपनी मशीनों और बॉयलरों को चलाने के लिए ताजे पानी या भू-जल पर निर्भर नहीं रहना पड़ेगा। नगर निगम के कुवाड़ा स्थित 30 एमएलडी (प्रतिदिन) क्षमता के सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित पानी का उपयोग औद्योगिक प्रक्रियाओं में होगा या नहीं इसके लिए कमेटी प्रोसेस हाउस का दौरा करने साथ उनसे चर्चा के बाद करेगी। यह दौरा बुधवार को होगा।
नगर निगम भीलवाड़ा और डिजायर एनर्जी सॉल्यूशंस प्राइवेट लिमिटेड के बीच इस शोधित पानी की खरीद को लेकर पहले ही अनुबंध हो चुका है। योजना के प्रथम चरण में चित्तौड़गढ़ रोड स्थित औद्योगिक क्षेत्र में पाइपलाइन बिछाकर पानी पहुंचाने की योजना है।
इस पानी के उपयोग से बॉयलरों और औद्योगिक मशीनों पर क्या प्रभाव पड़ेगा, इसके सूक्ष्म अध्ययन के लिए जिला कलक्टर ने एक तकनीकी समिति का गठन किया है। यह समिति अपनी रिपोर्ट कलक्टर को सौंपेगी। यह समिति टेक्सटाइल प्रक्रियाओं में सेकेंडरी ट्रीटेड पानी के प्रभाव का विश्लेषण करेगी। बॉयलर में आरओ ट्रीटेड पानी के उपयोग की तकनीकी और आर्थिक व्यवहार्यता की जांच करेगी। समिति थर्मैक्स इंडिया और ईसजीईसी जैसी कंपनियों से तकनीकी राय लेगी।
प्रदूषण नियंत्रण मंडल के क्षेत्रीय अधिकारी दीपक धनेटवाल के मार्गदर्शन में बनी इस कमेटी में उद्योग जगत के मुख्य अभियंताओ को शामिल किया गया है। इसमें डिजायर एनर्जी के अक्षय माथुर व रवि कुमार, शुभलक्ष्मी प्रोसेसर्स से सुखदेव शर्मा, सोना प्रोसेस से आनंद भाटी बीएसएल लिमिटेड से रामदयाल जाट तथा सांवरिया टैक्सफैब से अरविंद कुमार सिंह शामिल होंगे। समन्वय की जिम्मेदारी प्रदूषण नियंत्रण मंडल के कनिष्ठ पर्यावरण अभियंता कन्हैया लाल कुमावत को सौंपी गई है। धनेटवाल ने बताया कि भू-जल संसाधनों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए औद्योगिक प्रक्रियाओं में शोधित अपशिष्ट जल का पुन: उपयोग समय की मांग है। यह जल सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक बड़ा कदम साबित होगा।
कुवाड़ा में स्थित सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट से निकलने वाले शोधित 30 एमएलडी पानी को ट्रीट करने के बाद कोठारी नदी में छोड़ा जा रहा है। जबकि एनजीटी ने इस पानी का उपयोग करने के आदेश दे रखे हैं। लेकिन पिछले एक साल से एसटीपी का पानी ट्रीट करने के बाद नदी में ही छोड़ा जा रहा है। इस पानी को लेकर नगर निगम व डिजायर एनर्जी कम्पनी के मध्य 24 अप्रेल 2025 को एमओयू हुआ था।