भीलवाड़ा

This is the things of Bhilwara # यह है भीलवाड़ा की बातें

This is the things of Bhilwara यह जिला मंत्रीजी को रास नहीं आ रहा है। राजधानी में होने से प्रभारी बनने की चाहत उन्हें पड़ोसी जिले की थी, लेकिन आका ने कमान वस्त्रनगरी की सौंप दी। बेमन से जिम्मेदारी संभाली। काम करना शुरू किया था कि राजनीतिक नियुक्तियों ने राह और मुश्किल कर दी। इतना ही नहीं पारिवारिक पीड़ा भी अब तकलीफें बढ़ाने लगी है। उनके शुभचिंतक भी मंत्री जी की राशि में राहू व केतू के कुंडली मार कर बैठने से चिंतित है।

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This is the things of Bhilwara

नरेन्द्र वर्मा। सत्ता पर पड़ गए भारी.....चिंतन एवं मनन जरूरी है। चिंतन एवं मनन में जिनकी मौजूदगी जरूरी हो यदि वह ही नहीं आए तो ऐसे चिंतन मनन का औचित्य ही नहीं है। जिला मुख्यालय पर सत्ताधारी संगठन एवं विपक्ष के वरिष्ठों ने अपने ही स्तर पर श्रम दिवस पर बड़े आयोजन किए। एक ने रक्तदान दिवस कर ताकत दिखाई तो दूसरे ने श्रमिक हितों पर चिंतन व मनन के बहाने पार्टी के वरिष्ठों को एक मंच पर लाने की कोशिश की। परिणाम राजनीतिक गलियारे में चौंकाने वाले ही रहे। चिंतन मनन के लिए पार्टी का वरिष्ठ नेता कोई नहीं पहुंचा। लेकिन यही वरिष्ठ व बड़े नेता रक्तदान शिविर में उत्साह बढ़ाते जरूर नजर आए। इसकी खासी चर्चा हुई। आरोप प्रत्यारोप हुए तो समर्थकों ने बड़े नेताओं की पैरवी की। वे बोले कि वह तो जनता के बीच ही है। इधर, शिविर आयोजक इस बात से बड़े खुश थे कि चाहे विपक्षी पार्टी का लेबल उन पर लगा था, लेकिन नेताजी तो अपने ही है।


यह फार्मूला काम का

जिले में खाकी जी उलझे हुए है। शांति के आसार नजर ही नहीं आ रहे हैं। अपराधियों पर नकेल कसे तो कहीं पर भाईचारे पर ही संकट आ जाता है। इन सबसे निपटे तो अवैध बजरी दोहन का मसला उछल जाता है। सब खैरियत रहती है तो एसीबी की आंख टिक जाती है। यहां भी शांति एवं सुकून रहता है तो फिर किसी न किसी मामले में टाइगर की गाज गिर जाती है। यानी मुसीबतें कम नहीं होती है। ऐसे विकट हालात में कई थाना प्रभारी बेहतर काम करने की कोशिश करते हैं। शहर में सभी इस मामले में कुशल माने जाते हैं, लेकिन ग्रामीण अंचल में शिकायतें रहती है। इसके बावजूद शक्करगढ़ पुलिस का फार्मूला दाद देने वाला है। छोटा थाना होने के बावजूद यहां बड़ी सीख का संदेश जा रहा है। बजरी माफिया की नकेल कसने एवं कोई छूट न जाए, इसलिए यहां खनिज विभाग की ही टीम को सबसे पहले सूचना दी जा कर अवैध बजरी दोहन के खिलाफ हल्ला बोले हैं।

यहां दौड़ रहा है कंरट

अजमेर डिस्कॉम सुर्खियों में है। यहां शह एवं मात के साथ ही प्यार-मोहब्बत के किस्से हो रहे है। यहां साहेब की पदोन्नति की उम्मीद कई अधीनस्थ पाले हैं। यह उम्मीद उनके शुभचिंतक होने के नाते नहीं वरन कई अपने उम्मीदों के घोड़े छांव में बांधने की कोशिश कर रहे हैं। कई इंजीनियर तो मनचाहे स्थान की कुर्सी पाने की कोशिश में मंत्रियों की शरण में है। कुछ सरकारी की बिजली बेचने के बजाए निजी कंपनी के सोलर प्लांट की बिजली ही बेचने में लगे हैं। इन सबके के बीच कुछ ने कमालकर दिया। इनके प्यार मोहब्बत के किस्से सुर्खियों में है। कुछ अधीनस्थ तो सामाजिक बंधनों को बिसराते हुए आपस में ही दाम्पत्य सूत्र में बंध गए।


कोई लपेटे में न आ जाए
प्रदेश में भीषण गर्मी रौद्र रूप दिखा रही है। उसी गति से एसीबी भी भ्रष्टाचारियों पर कहर बरपा रही है। प्रदेश के कई बड़े नामधारी व आला अधिकारी दलालों के साथ नप गए। लगातार कार्रवाई के बावजूद भ्रष्ट लोगों का लालच कम नहीं हो रहा है। शहर एवं जिले में भी भ्रष्टाचार की जड़ें राजनीतिक संरक्षण से गहराती जा रही है। चर्चा है कि एसीबी के आला की निगाहें में भी जिला चढ़ाहै। गुप्तचर कुंडली मार कर बैठे हुए। कुछ खास पर नजर लगी है। उनके दलालों को टटोला जा रहा, उन्हें भी आभास है, लेकिन वह भी नहीं रूक रहे हैं।


रास नहीं आ रहा जिला
यह जिला मंत्रीजी को रास नहीं आ रहा है। राजधानी में होने से प्रभारी बनने की चाहत उन्हें पड़ोसी जिले की थी, लेकिन आका ने कमान वस्त्रनगरी की सौंप दी। बेमन से जिम्मेदारी संभाली। काम करना शुरू किया था कि राजनीतिक नियुक्तियों ने राह और मुश्किल कर दी। इतना ही नहीं पारिवारिक पीड़ा भी अब तकलीफें बढ़ाने लगी है। उनके शुभचिंतक भी मंत्री जी की राशि में राहू व केतू के कुंडली मार कर बैठने से चिंतित है।

Published on:
09 May 2022 09:22 am
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