आचार्य महाश्रमण व मुनि आदित्य सागर के बीच हुई 'धर्म-चर्चा', महावीर के सिद्धांतों को जन-जन तक पहुंचाने का लिया संकल्प
धर्मनगरी ब्यावर के समीप शनिवार को जैन समाज के इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय लिखा गया। अजमेर रोड स्थित दिल्ली पब्लिक स्कूल (खरवा) के सामने जब श्वेतांबर तेरापंथ धर्मसंघ के आचार्य महाश्रमण और दिगंबर संत मुनि आदित्य सागर का मिलन हुआ। वहां मौजूद श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे। करीब 10 मिनट तक चली इस आध्यात्मिक चर्चा में दोनों संतों ने भगवान महावीर के अहिंसा और अपरिग्रह के सिद्धांतों पर गहन विचार-विमर्श किया।
संघपति विकास सेठी ने बताया कि मुनि आदित्य सागर ससंघ किशनगढ़ से विहार करते हुए मांगलियावास पहुंचे थे। वहां से ब्यावर की ओर बढ़ते समय जैसे ही वे खरवा स्थित स्कूल के पास पहुंचे, वहां प्रवास कर रहे आचार्य महाश्रमण को इसकी जानकारी मिली। वात्सल्य और अपनत्व की मिसाल पेश करते हुए आचार्य महाश्रमण स्वयं दिगंबर मुनि की अगुवानी करने बाहर आए।
दोनों महान संतों के बीच करीब 10 मिनट तक जैन दर्शन और वर्तमान परिप्रेक्ष्य में धर्म के प्रभाव को लेकर चर्चा हुई। दोनों संतों ने एक स्वर में संकल्प दोहराया कि भगवान महावीर के बताए मार्ग पर चलकर ही विश्व शांति संभव है। उन्होंने समाज के हर वर्ग तक इन सिद्धांतों को ले जाने का आह्वान किया। इस दौरान मुनि अप्रमित सागर, सहज सागर और क्षुल्लक श्रेयस सागर भी उपस्थित रहे।
आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर ट्रस्ट के सदस्य एमके सेठी के अनुसार मुनि आदित्य सागर ससंघ का अगला पड़ाव ब्यावर और फिर भीलवाड़ा है। 6 जनवरी की शाम को ब्यावर से होगा विहार होगा। वे बिजयनगर होते हुए आगे भीलवाड़ा की ओर बढ़ेंगे। 11 जनवरी को भीलवाड़ा में मंगल प्रवेश होगा। वहीं, आचार्य महाश्रमण अपनी अहिंसा यात्रा के साथ अजमेर की ओर निरंतर विहार कर रहे हैं।
जब श्वेत धवल वस्त्रों में सुसज्जित तेरापंथ समाज का काफिला और दिगंबर संतों की चर्या का मिलन हुआ, तो हाइवे से गुजरने वाले राहगीर भी इस दुर्लभ दृश्य को देखने के लिए रुक गए। श्रद्धालुओं ने आचार्य महाश्रमण व मुनि आदित्यसागर के जयकारों से आकाश गुंजायमान कर दिया।